लखीमपुर खीरी। अतिरिक्त दहेज के लिए विवाहिता की हत्या के मामले में एडीजे मनोज कुमार सिंह की अदालत ने आरोपी पति को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास और 60 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
अभियोजन के अनुसार, निघासन थाना क्षेत्र के गांव दुलही निवासी मुक्ता प्रसाद ने वर्ष 2008 में अपनी बेटी समुद्री देवी की शादी सदर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मैनहा निवासी सुखलाल से की थी। शादी के कुछ समय बाद ही मोटरसाइकिल की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित किया जाने लगा। आरोप है कि 31 अगस्त, 2012 को सास सोनापति ने उसे खाने में जहर दे दिया, जिससे अगले दिन उसकी मौत हो गई।
पीड़िता के पिता मुक्ता प्रसाद ने पति, देवर समेत सास-ससुर के खिलाफ दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सुनवाई के दौरान गवाही से पहले मुक्ता प्रसाद की मौत हो गई। इसके बाद चाचा तालेराम, प्रमोद और मथुरा तथा माता कुसुम उर्फ मीना देवी ने बयान दर्ज कराए, लेकिन बाद में वे अपने पूर्व बयान से मुकर गए, जिस पर अदालत ने उन्हें पक्षद्राेही घोषित किया।
अदालत ने इसके बाद कांस्टेबल हरिश्चंद्र कनौजिया, कमलेश गुप्ता, डॉक्टर रामू वर्मा, एएसपी अखिलेश नारायण सिंह और रामस्वारथ यादव के बयान दर्ज किए। इसी दौरान एफएसएल रिपोर्ट में अल्युमिनियम फास्फाइड कीटनाशक विष की पुष्टि हुई।
साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पति सुखलाल को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। देवर को नाबालिग मानते हुए मामला किशोर न्याय बोर्ड भेज दिया गया, जबकि सास सोनापति और ससुर सोमेंद्र को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।