विस्थापितों का दर्द, पुनर्वास की मांग
वर्तमान में लगभग 200 परिवार गांव से दो किलोमीटर दूर तटबंध पर रह रहे हैं। वे तिरपाल, झोंपड़ियों और खुले आसमान के नीचे जीवनयापन कर रहे हैं। उनकी खेती, रोजगार और आजीविका के साधन समाप्त हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तीन वर्षों से वे इसी तरह रहने को मजबूर हैं। लेकिन अब तक स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था नहीं हो सकी है। रामबेटी ने बताया, "हमारा परिवार तीन वर्षों से तटबंध पर रह रहा है। हर बरसात में फिर उजड़ने का डर बना रहता है। अब लोगों का भरोसा टूट चुका है।"
प्रशासन की निगरानी
एसडीएम निघासन राजीव निगम ने बताया कि प्रशासन की टीम लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रही है। ग्रंट नंबर-12 डूब क्षेत्र घोषित गांव है। पिछले वर्ष जिन लोगों के मकानों का कटान हुआ था, उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिया गया था। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है।
बिजुआ में गोला तहसीलदार अरुण कुमार ने भी शारदा नदी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने बझेड़ा, रेवतीपुरवा, रामनगर, आषाढ़ी और पूजागांव में हालात का जायजा लिया। लेखपालों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।