पिछले एक सप्ताह से वर्षा न होने से एक बार फिर लोगों को उमस भरी गर्मी और कड़ी धूप से जूझना पड़ रहा है। मौसम साफ रहने से सुबह से कड़ी और चमकीली धूप से लोग बेहाल हैं। उधर तापमान में बढ़ोतरी होने से गर्मी में इजाफा हुआ है। वर्षा न होने से खेतों में लगी धान की फसल सूखने लगी है जबकि जो लोग अब तक धान की रोपाई नहीं कर पाए हैं उनकी रोपाई पिछड़ रही है।
सोमवार को अधिकतम तापमान 36.0 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। सोमवार को दिनभर कड़ी धूप रही। बच्चे सुबह तो स्कूल चले गए लेकिन दोपहर में घर लौटते समय वे पसीने से तर हो गए। राह चलते लोगों को कड़ी धूप के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ा। गर्मी इतनी ज्यादा थी कि लोगों को न घर में चैन मिला न बाहर। परेशानहाल लोग पसीना पोंछते नजर आए। उमस भरी गर्मी बाहर खुले में काम करने वाले लोगों को ज्यादा ही परेशानी उठानी पड़ी।
बारिश न होने से धान की रोपाई पिछड़ रही है। जो किसान धान की रोपाई कर चुके हैं। उनके खेत में जो पानी भरा है वह गर्म होकर धान की पौध को गला रहा है।धान लगे जिन खेतों में पानी सूख गया है उसमें लगी धान की पौध सूख रही है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुहेल का कहना है कि इस समय बरसात न होने से धान के उत्पादन पर बुरा असर पड़ सकता है। जो किसान धान की रोपाई अभी तक नहीं कर पाए हैं उनकी रोपाई काफी पिछड़ रही है। यही इस समय खेतों में पानी भरा होना और खेत पानी से खाली होना दोनों ही नुकसानदेह है।
वर्षा न होने की वजह से किसान ट्यूबवेल के जरिए खेतों में पानी भरकर धान की रोपाई कर रहे हैं। इससे धान की उत्पादन लागत बढ़ रही है। वर्षा न होना किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
वर्षा न होने और एकाएक उमस भरी गर्मी बढ़ने से बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। तमाम लोग वायरल और डायरिया से जूझ रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। निजी अस्पताल भी मरीजों से भरे पड़े हैं। मौसम के बदलाव से लोग सर्दी, जुकाम, बुखार आदि से परेशान हैं। समाज के सभी वर्ग वर्षा की दुआ कर रहे हैं।