लखीमपुर खीरी/ओयल। बदलते मौसम के बीच उल्टी, दस्त और बुखार जिले के बच्चों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है लेकिन एमसीएच विंग में शिफ्ट हुए जिला अस्पताल में अव्यवस्थाएं हावी हैं। एक हफ्ते में डायरिया बुखार के 56 बच्चे भर्ती हो चुके हैं। इसमें तीन की मौत हो चुकी है। जबकि पहले एक हफ्ते में करीब 30 से 32 बच्चे इलाज के लिए आते थे। बीमार बच्चों की संख्या बढ़ने के बावजूद अभी तक दस बेड का आईसीयू पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है। 14 बेड के चिल्ड्रेन वार्ड की सारी जिम्मेदारी महज एक डॉक्टर पर है।
संक्रामक रोगों ने जिले में पांव पसार लिए हैं, जिसकी वजह से रोजाना उल्टी, दस्त और बुखार से पीड़ित तमाम बच्चे जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती हो रहे हैं। बीते मंगलवार को तीन बच्चों की मौत हो गई। हैरानी की बात यह कि स्वास्थ्य सुविधाओं का जिले का सबसे बड़ा केंद्र होने के बावजूद विभाग के बड़े अधिकारी से लेकर प्रशासन तक चुप्पी साधे है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि जिस रफ्तार से एमसीएच विंग में शिफ्ट हुए जिला अस्पताल में बच्चों के भर्ती होने का सिलसिला जारी है, उसके मुकाबले वहां पर डॉक्टर ही नहीं हैं। सिर्फ एक डॉक्टर आरपी वर्मा के सहारे जिला अस्पताल का चिल्ड्रेन वार्ड चल रहा है, जबकि अकेले चिल्ड्रेन वार्ड के लिये कम से कम तीन डॉक्टर होने चाहिए।
आईसीयू वार्ड के लिये भी कम से कम दो डॉक्टरों की जरूरत है लेकिन यहां एक भी डॉक्टर नहीं है। ऐसे में अस्पताल में भर्ती होने वाले बच्चों को बेहतर इलाज कैसे मिलेगा, इसका जवाब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के पास नहीं है।
अभी चिल्ड्रेन वार्ड में सात बच्चे भर्ती
लखीमपुर खीरी। बुधवार को सात बच्चे चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती हुए हैं, जिसमें डायरिया पीड़ित सात वर्षीय रूकैय्या पुत्री इशहाक निवासी नौरंगाबाद, तीन माह की बेबी पुत्र अजय मिश्रा निवासी ईदगाह, सात वर्षीय आकांक्षा पुत्री दिलीप निवासी फत्तेपुर सैधरी और बुखार पीड़ित पांच वर्षीय सत्यम पुत्र मुकेश निवासी सीतापुर, 12 वर्षीय सुधांशु पुत्र बहादुर निवासी बम्हनपुर एवं 10वर्षीय अखिल पुत्र दिलीप निवासी लगुचा एवं आठ वर्षीय अंजलि पुत्र राम सिंह निवासी घोसियाना के नाम शामिल हैं।
आईसीयू : चार बेड अब भी नहीं तैयार
जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का यह आलम है कि अभी तक आईसीयू वार्ड पूरी तरह से बनकर तैैयार नहीं हो सका है। बुधवार को डीएम के आगमन की सूचना मिलने पर हरकत में आए सीएमएस ने आईसीयू के छह बेड तैयार कराए हैं, जबकि चार बेड अभी तक तैयार नहीं है। इस मौसम में डायरिया, बुखार के साथ जेई और एईएस होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में आईसीयू वार्ड का अब तक तैयार न होना साफ साफ जिम्मेदारों की लापरवाही दर्शा रहा है।
मेडिकल कचरा बढ़ा रहा संक्रमण का खतरा
एमसीएच विंग में संचालित जिला अस्पताल का मेडिकल कचरा परिसर में ही पड़ा है। इससे उठती दुर्गंध अस्पताल स्टाफ से लेकर मरीज और तीमारदारों के लिए मुसीबत बन गई है। वहीं इसकी वजह से संक्रमण का खतरा भी मंडराने लगा है। स्टाफ का कहना है कि जिला अस्पताल को एमसीएम में शिफ्ट हुए एक माह से ज्यादा का समय हो गया है। इसके बावजूद अभी तक अस्पताल में अव्यवस्थाएं हावी हैं।
बच्चों का आईसीयू वार्ड बुधवार को व्यवस्थित करा दिया है, जो कुछ कमियां रह गई हैं। उन्हें बृहस्पतिवार को दुरुस्त करा दिया जाएगा, जिससे बच्चों को बेहतर इलाज मिल सके। - डॉ. हर्षवर्धन सीएमएस जिला अस्पताल