बांकेगंज। कस्बा स्थित सीएचसी में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल बेहाल है। सीएचसी में लगातार बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं, तो वहीं पिछले कई महीनों से जीवन रक्षक इंजेक्शन मेनीटॉल और डिक्लोफेनाक नहीं आ रहा है। सात डॉक्टरों के मुकाबले महज तीन डॉक्टरों की तैैनाती है। अस्पताल में बाल रोग समेत हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने से मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ता है।
बदलते मौसम के साथ ही क्षेत्र में वायरल बुखार तेजी से फैल रहा है। ओपीडी में मौजूद सीनियर फिजिशियन डॉ अनीसुल हसन अंसारी ने बताया कि इस समय करीब 300 से अधिक मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं। इसमें वायरल बुखार के मरीज 70-80 होते हैं। डॉक्टर का दावा है कि उनके पास पर्याप्त दवाएं हैं लेकिन सात डॉक्टरों में सिर्फ तीन की तैनाती है। इसके अलावा सिर पर लगने वाली चोट जैसे गंभीर मरीजों के लिए मेनीटॉल जैसे इंजेक्शन नही हैं।
इन इंजेक्शनों के लिए तीमारदारों को बाहर की दौड़ लगानी पड़ रही है। यहां की ओपीडी में प्रतिदिन 200 से 300 मरीज आते हैं। इसमें सर्वाधिक मारपीट व हादसे में घायल होने वाले मरीज होते हैं। इनमें अधिकांश हेड इंजरी ( सिर में चोट) के होते हैं। इन दिनों पेट दर्द के मरीज भी बढ़ रहे हैं। मेनीटॉल इंजेक्शन महीनों से नहीं है। इसके अलावा दर्द निवारक इंजेक्शन डिक्लोफेनाक का भी टोटा है। अधीक्षक डॉ. एसके नरवरिया का दावा है कि अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध हैं। मेनीटॉल और डिक्लोफेनाक इंजेक्शन के लिए इंडेट जिला अस्पताल भेजा गया है। जल्द ही दोनों इंजेक्शन उपलब्ध होंगे।
16 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में 12 निर्माणाधीन, नहीं बैठ रहे चिकित्सक
बांकेगंज। सीएचसी क्षेत्र में लोगों को इलाज की सुविधा के लिए बने 16 स्वास्थ्य उपकेंद्र की व्यवस्था खुद बीमार है। हालात यह हैं कि इसमें भवनों का निर्माण न होने से 30 फीसदी केंद्रों पर तैनात कर्मचारी नहीं बैठ रहे हैं या फिर ताले लटक रहे हैं। ऐसे में गर्भवती महिलाओं, मधुमेह समेत अन्य बीमारियों से जुड़ी मुफ्त जांचों और इलाज की सुविधा मरीजों को नहीं मिल पा रही है।
बांकेगंज सीएचसी क्षेत्र में लोगों को इलाज मुहैया कराने के लिए कुल 28 स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं। इसमें वर्तमान समय में उदयपुर, प्रतापपुर, मक्कागंज, मैलानी, संसारपुर, अलीगंज, मुस्तफाबाद समेत कुल 16 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्थापित किए गए हैं। 12 सेंटर निर्माणधीन हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सेंटरों पर भवन निर्माण न होने की दशा में यहां तैनात स्वास्थ्य कर्मी नियमित नहीं आते। जिससे मरीजों को जांच के लिए गोला या फिर लखीमपुर तक दौड़ लगानी पड़ती है। ऐसे में ग्रामीणों के लिए वेलनेस सेंटर बेमतलब साबित हो रहे हैं। हालत यह है कि ग्रामीणों को इलाज मुहैया कराने के लिए प्रतापपुर, पहाड़नगर, बब्बू फार्म, छत्तीपुर, कालीचरन पुर, कुसुमी कालोनी, जनकपुर, अंगदपुर, खरेहटा, कंधईपुर, भैटिया, सिंगहा आदि में यह सेंटर जर्जर हैं या फिर बंद पड़े हैं। जबकि यहां एएनएम तैनात हैं।
वेलनेस सेंटर का मुख्य उद्देश गांव के लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने व गंभीर रोग वाले मरीजों की पहचान करना है। इन सेंटरों पर कैंसर, डायबिटीज जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग की सुविधा है। ताकि समय रहते इन बीमारियों का पता लगाकर सही इलाज उपलब्ध कराया जा सके। सेंटर में प्रसव, बाल स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य सुविधा और गैर संक्रामक रोगों के प्रबंधन की सुविधा के साथ ही आंख, नाक, कान व गले से संबधित बीमारियों की जांच की जानी है।
‘पुराने सभी सेंटरों पर स्टाफ तैनात है। उन्हें नियमित सेंटर पर पहुंचकर मरीजों की जांच करने के निर्देश हैं। यदि कहीं पर सेंटर बंद रहते हैं या फिर नियमित नहीं खुल रहे हैं तो संबंधित स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’ - डॉ. एसके नरवरिया,अधीक्षक