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Lakhimpur Kheri News: लिलौटी, देवकली सहित कई धार्मिक स्थलों के विकास की बंधी उम्मीद

Sun, 01 Feb 2026 11:22 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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महंत रोहित गिरि
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लखीमपुर खीरी। केंद्रीय बजट में छोटे शहरों के तीर्थ स्थलों को विकसित किए जाने की घोषणा से जिले में भी धार्मिक पर्यटन के विकास की आस बंधी है। यहां पर गोला गोकर्णनाथ का पौराणिक शिव मंदिर, अमीरनगर क्षेत्र का टेढ़ेनाथ धाम सहित ललौटी नाथ धाम और देवकली तीर्थ आदि कई प्राचीन धार्मिक स्थल हैं। इसमें कइयों का धार्मिक पर्यटन विकास कराया जा चुका है तो कुछ का कराया जा रहा है।
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शहर के उत्तर दिशा में आठ किलोमीटर दूर लिलौटीनाथ धार्मिक स्थल, शहर से पश्चिम दिशा में छह किमी. दूर देवकली स्थान है। ओयल का मेढ़क मंदिर, लखीमपुर शहर का भुईफोरवनाथ मंदिर, संकटादेवी मंदिर, सिंगाही का काली माता मंदिर आदि काफी ऐसे स्थान हैं, जिनको विकास की जरूरत है। अभी तक इनके विकास के लिए कोई खाका नहीं खींचा गया। लिलौटीनाथ, देवकली सहित लगभग सभी धार्मिक स्थल अनदेखी के शिकार हैं। कहीं सड़क खराब है तो कहीं घाट की उचित व्यवस्था नहीं है। ऐसे में यहां श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। महंत व पुजारियों को भी दिक्कतें होती है।
अब केंद्रीय बजट में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की घोषणा से अब इनके विकास की उम्मीद बंधी है। धार्मिक स्थलों के संबंधित महंतों ने केंद्र सरकार के बजट पर अपनी-अपनी बात रखी है।
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-पौराणिक लिलौटीनाथ मंदिर उपेक्षा का शिकार है। यहां न स्नानघर है और न ही विश्रामालय। घाट पर झाड़ियां भी उग आई हैं। सड़क भी कुछ ठीक नहीं है। मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर घाट, विश्रामालय, यज्ञ स्थल, भंडारा कक्ष, सड़क, शौचालय और संगम स्थल को जीर्णोद्धार की जरूरत है।

-रोहित गिरि, महंत, लिलौटीनाथ मंदिर
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बजट में धार्मिक स्थलों के विकास की बात कही गई है, यह सुनकर अच्छा लगा। उम्मीद है कि देवकली तीर्थ का पक्का घाट बनाया जाए। तीर्थ स्थल की जमीन की पैमाइश कराकर बाउंड्रीवाल बनवाई जाए। बैठने के लिए बेंचों का निर्माण एवं घाट के चारों तरफ विद्युतीकरण करवाया जाए।
-प्रमोद दीक्षित, महंत देवकली तीर्थ स्थल
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जिले में ये हैं प्रमुख धार्मिक स्थल
-जिले का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल गोला गोकर्णनाथ मंदिर हैं, जहां सिर्फ सावन में हर साल 20 लाख से अधिक श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। साल में दो बार मेला लगता है, तब भी लाखों को भक्त पहुंचते हैं।
-शहर का प्राचीन संकटादेवी मंदिर है। मान्यता है कि मां संकटा देवी सभी के संकटों को हरती हैं। यहां पर हमेशा श्रद्धालुओं का आना-जाना रहता है। नवरात्र में ज्यादा भीड़ रहती है। मुंडन संस्कार, विवाह से पहले बेटियों की दिखाई, विवाह के बाद माता रानी का आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालु आते हैं।
-शहर से 10 किलोमीटर दूर मेढ़क मंदिर है। यह मंदिर मेढ़क की पीठ पर बना है। यह मंदिर लखीमपुर खीरी के प्राचीन मंदिरों में एक है। यहां सावन में काफी भीड़ रहती है।
-शहर से छह किलोमीटर दूर देवकली तीर्थ भी काफी प्राचीन है। सावन में तो लाखों भक्त पहुंचते ही हैं। साथ ही नागपंचमी पर यहां विशेष महत्व है। नागपंचमी वाले दिन तालाब से मिट्टी लेने के लिए लाखों लोग पहुंचते है। मान्यता है कि तालाब की मिट्टी को घर पर डालने से सांप नहीं आते हैं।
-शहर से आठ किमी दूर शारदानगर रोड पर स्थित लिलौटीनाथ धाम भी पौराणिक तीर्थ स्थल है। यहां पर सावन भर भक्तों की भारी भीड़ जुटती है।

महंत रोहित गिरि

महंत रोहित गिरि

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