लखीमपुर खीरी/पलियाकलां। उत्तराखंड के जिम कार्बेट नेशनल पार्क की तर्ज पर दुधवा टाइगर रिजर्व में भी इको टूरिज्म के तहत होम स्टे की योजना परवान नहीं चढ़ पाई। जनजातीय परियोजना की ओर से चंदनचौकी में थारू शिल्प ग्राम का निर्माण कराया गया था, लेकिन यह अभी शुरू नहीं हो पाया है।
वर्ष 2018 के फरवरी माह में दुधवा में अंतरराष्ट्रीय पक्षी मेले का आयोजन किया गया था। तब यहां देश-विदेश के वन्यजीव प्रेमियों का जुटना हुआ था। उसी दौरान यहां आए प्रदेश के तत्कालीन पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ एसके उपाध्याय ने दुधवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में रहने वाले थारू जनजाति के लोगों के यहां सैलानियों के लिए होम स्टे की शुरुआत कराने की योजना पर काम शुरू होने की बात कही थी, पर यह योजना अभी पूरी तरह से फलीभूत नहीं हो पाई है।
अभी तीन होम स्टे ही हो रहे संचालित
सैलानियों के लिए होम स्टे के रूप में कई जगहों पर दुधवा प्रशासन ने कुछ स्थानों को चिह्नित किया था। इसमें गाइडलाइन के मुताबिक, जरूरी बातें होने पर होम स्टे के लिए उनको अनुमोदित भी किया गया था। इसमें थारू ग्राम चंदनचौकी में एक और कटैया में दो होम स्टे संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा चंदनचौकी में ही दुधवा के सैलानियों को आकर्षित करने के लिए जनजातीय परियोजना से थारू शिल्पग्राम भी तैयार किया गया है। करीब एक करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से इस शिल्पग्राम को तैयार किया गया है। इसमें चार थारू हट, रेस्टोरेंट, म्यूजियम, नृत्य कला केंद्र, 10 दुकानें भी बनाई गई हैं। एक प्रशिक्षण केंद्र भी बना है। हालांकि अभी इस शिल्पग्राम का संचालन शुरू नहीं हो सका है। दुधवा टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक डाॅ. रंगाराजू टी. ने बताया कि जिलास्तर से अभी कुछ जगहों पर होम स्टे की सुविधा है, जिसमें चंदनचौकी व कटैया समेत अन्य स्थान शामिल हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में हैं थारुओं के 24 गांव
वैसे तो जिले में थारू जनजाति के लोगों की कुल 26 ग्राम पंचायत हैं। लेकिन, इनमें पलिया ब्लॉक की 24 ग्राम पंचायत ही ऐसी हैं, जो दुधवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आती हैं। इन ग्राम पंचायतों में थारू समाज के करीब 50 हजार से ज्यादा लोग निवास करते हैं। इन गांवों में होम स्टे की योजना फलीभूत होने से एक तरफ जहां सैलानियों को थारू संस्कृति को करीब से जानने का मौका मिलेगा, वहीं जनजातीय लोगों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।
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थारू शिल्पग्राम बनकर तैयार हो गया है और उसकी साज-सज्जा का काम भी पूरा हो गया है। इसकी शुरुआत के लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार भी किया जा चुका है। उम्मीद है कि दिसंबर माह के पहले सप्ताह में इसका उद्घाटन भी हो जाए। इसके लिए लगातार अधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है।
यूके सिंह, परियोजना अधिकारी