बांकेगंज। आज जहां पूरे देश में असहिष्णुता और सांप्रदायिक झगड़ों की बात कही जा रही है, वहीं बांकेगंज ब्लॉक क्षेत्र की पंचायत कुकरा में हिंदू-मुस्लिम आपसी एकता और सौहार्द की मिसाल कायम कर रहे हैं। यहां होने वाली दुर्गा पूजा में हिंदू-मुस्लिम समान रूप से हिस्सा लेते हैं। इनमें कुछ तो ऐसे हैं जो देवी जागरण और नियमित होने वाली पूजा में भी श्रद्धा के साथ हिस्सा लेते हैं।
ब्लॉक क्षेत्र के कुकरा गांव के मोहल्ला गढ़ी के शिव मंदिर प्रांगण में चल रही षष्टम दुर्गा पूजा में गांव की प्रधान के पति फजलू रहमान और मोहल्ले में मुस्लिम समुदाय के अन्य काफी लोग दुर्गा पूजा में हिस्सा ले रहे हैं। इनमें एक मुस्लिम श्रद्धालु ऐसा भी है जो पिछले कई वर्षों से दुर्गा पूजा में सहयोग करता चला आ रहा है। यहां के रहने वाले जकीउल्ला खां बरकाती न केवल दुर्गा पूजा में भागेदारी करते हैं, बल्कि सावन के महीने में गोला शिव मंदिर जाने वाले कांवड़ियों की सेवा में भी पूरा हाथ बंटाते हैं। वह हर रक्षाबंधन पर अपनी मुंहबोली हिंदू बहन से राखी बंधवाते हैं और उसे उपहार में कभी गाय तो कभी तुलसी और चंदन के पौधे भेंट कर भाई का फर्ज निभाते हैं। भइयादूज में भी वह अपनी मुंहबोली हिंदू बहन से टीका कराकर ऐसे ही उपहार देता है।
इन दिनों कुकरा में चल रहे दुर्गा पूजा समारोह में न केवल उसने आर्थिक सहयोग किया बल्कि मां के दरबार में रोज हाजिरी भी देने जाते हैं और आरती में हिस्सा भी लेते हैं। दुर्गा जागरण समिति के सेवादारों अशोक विश्वकर्मा, विनोद विश्वकर्मा, रमेश यादव, विनोद राठौर आदि ने बताया कि पिछले छह वर्षों से हो रही दुर्गा पूजा में मुस्लिम समुदाय के लोग सहयोग करते चले आ रहे हैं। मुस्लिम प्रधान के पति फजलू रहमान भी इस आयोजन में बराबर हिस्सा ले रहे हैं। यही नहीं कुकरा में लगने वाले ताजिया के मेले में हिंदू समुदाय के लोग भी बराबर हिस्सेदारी करते हैं। इस सांप्रदायिक सौहार्द की लोग जमकर सराहना कर रहे हैं।
ईश्वर अल्लाह में कोई फर्क नहीं
कुकरा निवासी जकीउल्ला खां बरकाती का कहना है कि इन लोगों के बीच रहकर हमेशा मदद मिली है। हम कभी ईश्वर और अल्लाह में फर्क नहीं करते। हिंदुओं का त्योहार अपने ही त्योहार की तरह मनाते हैं।
यहां हिंदू-मुस्लिम में रहा हमेशा भाईचारा
ग्राम पंचायत कुकरा के प्रधानपति फजलू रहमान का कहना है कि कुकरा गांव ही नहीं आसपास के पूरे इलाके में हिंदू -मुस्लिम भाईचारा मिसाल रहा है। हम लोग पूर्वजों की उसी परंपरा का निर्वहन करते हैं।
आपसी भाईचारा हमारे संस्कार में
सलेमपुर गांव निवासी बंदे हसन का कहना है कि बचपन से ही हमें हमारे परिवार वालों ने किसी धर्म में भेदभाव न करने की सीख दी है। आपसी भाईचारा तो हमारे संस्कार में है। दोनों समुदाय के लोग एक दूसरे के त्योहार में मिलकर आपसी एकता और सौहार्द की मिसाल कायम की है।