देहात क्षेत्र की महिलाओं में खून की अधिक कमी
गांवों में नसीब नहीं हो पाती आयरन की गोलियां
जिले की महिलाएं आजकल खून में हीमोग्लोबिन की कमी से जूझ रही हैं। प्रति माह औसतन तीस महिलाएं अस्पताल में आ रही हैं, जिनमें हीमोग्लोबिन की मात्रा छह ग्राम से भी कम पाई गई है। इसमें अधिकतर महिलाएं देहात क्षेत्र की है। इसके लिए सेहत महकमा भी कम जिम्मेदार नहीं है। गांवों में महिलाओं को आयरन की गोलियां नहीं मिल पाती हैं।
चिकित्सकों के मुताबिक समान्य महिला में 12 से 14 ग्राम हीमोग्लोबिन जरूरी है। गर्भवती महिलाओं में छह ग्राम से कम हीमोग्लोबिन होने पर जच्चा-बच्चा को जान का खतरा बना रहता है। जिला महिला अस्पताल के चालू वर्ष के जनवरी से मार्च तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो इन तीन महीनों में लगभग डेढ़ हजार महिलाओं ने खून की जांच कराई। इनमें हर माह तीस महिलाओं में हीमोग्लोबिन छह ग्राम से कम मिला। चूंकि छह ग्राम से कम हीमोग्लोबिन होने पर जच्चा-बच्चा दोनों को ही जान का खतरा रहता है। उन्होंने या तो खून चढ़वाया या फिर सामान्य स्थिति में पहुंचने के लिए दवाओं का सहारा लिया।
महिला अस्पताल के आंकड़े
माह भर्ती छह ग्राम से कम
जनवरी 412 31
फरवरी 396 32
मार्च 315 28
खून की कमी के कारण
- खानपान में कमी
- प्रदूषित पानी पीने से पेट में कीड़े हो जाना
- समय पर खून की जांच न होना
- पीलिया और मलेरिया हो जाना
- बार-बार गर्भपात होना
- मासिक धर्म जल्दी-जल्दी होना
उपाय
- हरी सब्जियां, दाल, पनीर का सेवन करें
- अंडा, मछली, मीट खाएं
- महिलाओं को नियमित खून की जांच करानी चाहिये
समय पर कराएं खून की जांच : सीएमएस
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ मीरा वर्मा ने बताया कि अस्पताल में आने वाली पचास प्रतिशत महिलाओं में दस ग्राम से कम हीमोग्लोबिन पाया जाता है। वहीं तीस प्रतिशत महिलाओं को आठ प्रतिशत और बीस प्रतिशत महिलाओं में छह ग्राम से कम पाया जाता है। छह ग्राम से कम हीमोग्लोबिन होने पर गर्भवती महिला और उसके बच्चे की जाने का खतरा बना रहता है। खून की कमी जानलेवा हो सकती है। आयरन की गोलियां खाने से खून की कमी नहीं रहेगी और न ही किसी तरह का खतरा रहेगा।