लखीमपुर खीरी। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के नए नियम लागू होने के बाद से जिले में एक भी स्लाटर हाउस चालू नहीं हो पाया। ऐसे में भैंस के मीट का इंतजाम तो बरेली और उन्नाव से लाकर कर लिया गया है, मगर बकरे चोरी-छुपे काटकर बहुत ही कम मात्रा मीट सप्लाई हो पा रहा है। ऐसे में भैंस के मीट को ही दुकानदार बकरा का बताकर बेच रहे हैं।
पांच अगस्त 2011 से खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम लागू है। इसके बाद से मीट/चिकन विक्रेताओं के लिए नियम कानून सख्त हो गए हैैं। सभी मीट विक्रेताओं के लिए पंजीकरण/लाइसेंस बनवाना अनिवार्य है, जिसके लिए दुकान के मानक पूरे करने होंगे। जनपद में करीब एक हजार मीट/चिकन विक्रेता हैं, लेकिन अभी तक सिर्फ सात दुकानदारों का पंजीकरण हुआ है। शेष दुकानदार अवैध तरीके से मीट का कारोबार कर रहे हैं। एक भी स्लाटर हाउस चालू न होने से मीट दुकानदारों को लाइसेंस जारी करने में एफएसडीए को तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। वहीं दूसरा कारण यह भी है कि दुकानदार खाद्य सुरक्षा के मानक पूरे नहीं कर पा रहे हैैं। इन सब पेचीदगियों से उपभोक्ताओं के लिए मीट गुणवत्ता एक गंभीर मुद्दा बन गया है। ज्यादातर दुकानदार अवैध तरीके से मीट का कारोबार कर रहे हैं।
60 से ज्यादा मामले एडीएम कोर्ट में चल रहे
मीट दुकानदारों के खिलाफ एफएसडीए टीम ने अभियान चलाकर कार्रवाई भी की है, लेकिन इसका खास असर नहीं हुआ। मीट धंधा बेरोकटोक जारी है। एडीएम कोर्ट में करीब 60 दुकानदारों के खिलाफ दायर मामलों में सुनवाई चल रही है। जबकि एक दर्जन से अधिक दुकानदारों पर जुर्माना किया जा चुका है।