लखीमपुर खीरी। डॉक्टरों के तबादले के दौरान बरती गई लापरवाही की वजह से महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली हो गया है। इस वजह से अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लग गया है। गर्भवती महिलाओं की जांच तक नहीं हो पा रही है। ऐसे में अस्पताल आई गर्भवती महिलाएं जांच कराने के लिए निजी सेंटरों की दौड़ लगाकर पैसे खर्च करने के लिए मजबूर हैं।
शासन की ओर से महिला अस्पताल की डॉ. मीनाक्षी, डॉ. पुष्पलता, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार सहित रेडियोलॉजिस्ट डॉ. केके रंजन का तबादला कर दिया गया। इस पर डॉ. मीनाक्षी व रेडियोलॉजिस्ट कार्यमुक्त हो गए। इससे अस्पताल में इलाज से लेकर जांच तक संकट खड़ा हो गया। हालांकि एक महिला डॉक्टर के रिलीव होने से महिलाओं के इलाज पर कोई खास असर तो नहीं पड़ा, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के जाने से अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लग गया। इससे सबसे ज्यादा दिक्कत महिला अस्पताल आने वाली गर्भवती महिलाओं की बढ़ गई। बता दें कि महिला अस्पताल में जहां रोजाना 400 से 500 की ओपीडी होती है तो वहीं 10 से 15 प्रसव। ऐसे में ओपीडी में आने वाली 40 से 50 गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण महिलाएं निजी केंद्रों पर जांच कराने के लिए मजबूर हो रही हैं।
जिला अस्पताल में मच रही मारामारी
महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड बंद होने से महिलाएं जिला अस्पताल में जांच के लिए दौड़ रही हैं। इससे वहां पर भीड़ होने से जांच के लिए मारामारी मचती है। बिजली चले जाने पर महिलाओं को जांच के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे उमस भरी गर्मी में गर्भवती महिलाओं से लेकर उनके साथ आने वाले लोग परेशान होते हैं।
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शासन से रेडियोलॉजिस्ट का तबादला हो गया है। इसी वजह से अल्ट्रासाउंड होना बंद हो गए हैं। महिलाओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसलिए जिला अस्पताल में जांच की व्यवस्था कराई गई है। महिलाएं वहीं जाकर अल्ट्रासाउंड करवा रही हैं। रेडियोलॉजिस्ट के आते ही अस्पताल में जांचें होना शुरू हो जाएंगी।’
- डॉ. ज्योति मेहरोत्रा सीएमएस महिला अस्पताल