जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज। संवाद
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लखीमपुर खीरी। एक तो कोरोनाकाल, दूसरे बदल रहे मौसम ने बुखार पीड़ितों की संख्या बढ़ा दी है। इससे जिला अस्पताल में रोजाना बुखार पीड़ितों की भीड़ उमड़ रही है। ओपीडी पहुंचे मरीजों में वायरल, डेंगू, मलेरिया और टाइफायड बुखार की चपेट में आने वालों की संख्या ज्यादा है। इसमें कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिनकी प्लेटलेट्स भी कम हैं।
सोमवार को चिल्ड्रन वार्ड में बुखार पीड़ित एक बच्चे की मौत भी हो गई।
शासन ने भले ही संक्रामक रोगों की रोकथाम को लेकर अक्तूबर माह को संचारी रोग नियंत्रण माह के रूप में मनाया हो। मगर, कागजों पर चली कवायद जिले वासियों के लिए मुसीबत बनने लगी है। जिले भर में अब संक्रामक रोग पांव पसारने लगे हैं। इसका प्रमाण सरकारी और निजी अस्पतालों में उमड़ रही भीड़ है। इसमें सबसे ज्यादा मरीज वायरल बुखार के हैं। हालांकि जांच के दौरान डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड के भी मरीज निकल रहे हैं। बुखार के बढ़ते प्रकोप से जिला अस्पताल ही नहीं निजी अस्पतालों में भी मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। सोमवार को जिला अस्पताल में 1200 के करीब नए पर्चे, जबकि इतने ही मरीज पुराने पर्चों पर देखे गए। इन मरीजों में सबसे ज्यादा संख्या संक्रामक से पीड़ितों की है। वहीं निजी अस्पतालों में भी सैकड़ों लोग रोजाना इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
बुखार पीड़ित एक बच्चे की मौत
बुखार आने पर सोमवार को जिला अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में सात साल के आदर्श पुत्र अमर सिंह निवासी छाउछ एवं खमरिया निवासी संतोष कुमार ने आठ माह के पुत्र अनमोल को भर्ती कराया था। मगर, इलाज के दौरान आदर्श की मौत हो गई।
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इस समय रोजाना 12-13 सौ की ओपीडी हो रही है। सबसे ज्यादा मरीज बुखार के आ रहे हैं। सर्दी, जुकाम, बुखार और कोरोना के लक्षण लगभग एक जैसे हैं। इसलिए ऐसे मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
-डॉ. आरसी अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल