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जेई की दस्तक, आठ साल के बच्चे में पुष्टि

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आईसीयू वार्ड में भर्ती बच्चों का इलाज देखते डॉ. राजेश कुमार। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। कोरोना काल में एईएस (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) के बाद अब जेई (जापानी इंसेफेलाइटिस) ने भी दस्तक दे दी है। आईसीयू वार्ड में भर्ती एक आठ वर्षीय बच्चे में जेई की पुष्टि हुई है। फिलहाल बच्चे की हालत में सुधार होना बताया जा रहा है।
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भीरा क्षेत्र के गांव गुलरिया निवासी तिलकराम बुखार पीड़ित आठ वर्षीय पुत्र बबलू को लेकर जिला अस्पताल आए। हालत गंभीर होने के कारण चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती कर उसका इलाज शुरू हो गया। सेहत में सुधार न होने पर उसका इलाज कर रहे डॉक्टर ने एईएस की आशंका जताकर उसे आईसीयू में भर्ती कराकर जांच के लिए सैंपल भेजवाया। मंगलवार को आई जांच रिपोर्ट में जेई की पुष्टि हुई। फिलहाल वार्ड स्टाफ बबलू की सेहत में सुधार बता रहा है।
जापानी इंसेफेलाइटिस के लक्षण
तेज बुखार के साथ बार-बार उल्टी होती है। समय से इलाज न मिलने पर बच्चे की सोचने, समझने और सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
ऐसे करें बचाव
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि बचाव के लिए बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण कराएं। मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी व अन्य संसाधन अपनाएं। दिन में शरीर ढकने वाले कपड़े पहने। खाना खाने से पहले, शौच जाने के बाद एवं पशुओं के संपर्क में आने के बाद हाथ साबुन से धुलें। घर एवं आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखें। जलभराव न होने दें। पानी उबाल कर पिएं। बारिश के मौसम में बच्चों को बेहतर खाना दें। बुखार आने पर लापरवाही न कर सरकारी अस्पताल लाकर दिखाएं। बुखार तेज आने पर गीले कपड़े से पीड़ित का बदन पोछते रहें।
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बुखार पीड़ित दो बच्चे रेफर
जिला अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में सोमवार को बुखार पीड़ित चार बच्चे भर्ती हुए। जबकि पहले से भर्ती दो बच्चों की हालत में सुधार न होने पर लखनऊ रेफर कर दिया गया। बुखार आने पर गोला के देवरिया निवासी राजेश दो साल की पुत्री कविता, रजागंज निवासी निवासी अमित कुमार तीन साल की पुत्री जानवी, फूलबेहड़ निवासी विनोद कुमार दो साल के पुत्र विवेक को भर्ती किया गया है। जबकि दो दिन पहले बुखार आने पर भर्ती कराई गौरी और प्रवेंद्र की हालत में सुधार न होने पर दोनों को मेडिकल कॉलेज लखनऊ के लिए रेफर कर दिया गया।
आईसीयू वार्ड में भर्ती एक बच्चे में जेई की पुष्टि हुई है। बच्चे की हालत में पहले से बेहतर बताई जा ही है। वहीं अन्य भर्ती बच्चों की भी जांच कराई जा रही है।
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- डॉ. आरसी अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल
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