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सर्दी का सितम, बच्चों को कर रहा बेदम

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लखीमपुर खीरी। गलन वाली सर्दी बच्चों के लिए मुसीबत बनी हुई है। बच्चे कोल्ड डायरिया और निमोनिया की चपेट में आने लगे हैं। पीड़ित बच्चों की संख्या दिन पर दिन जिला अस्पताल में बढ़ने लगी है। वहीं गंभीर रूप से पीड़ित बच्चों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी वर्मा का कहना है कि मौसम में बदलाव के कारण नमी बन जाती है। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इससे सबसे अधिक बच्चे प्रभावित होते है, क्योंकि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर होती है। ऐसे में बच्चों का सर्दी से बचाव करना चाहिए। ठंड बढ़ने में बच्चों में कोल्ड डायरिया, निमोनिया, एलर्जी, सर्दी, बुखार, खांसी एवं त्वचा संबंधी तमाम बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मौसम में सावधानी बरतने से बच्चों को बीमार होने से बचाया जा सकता है।
डायरिया और निमोनिया पीड़ित सात बच्चे भर्ती
बुधवार को जिला अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में सात बच्चे भर्ती हुए। निमोनिया होने पर पलिया के टेहरा निवासी साबिर ने एक माह के पुत्र रिहान, लहरपुर निवासी रामू ने तीन माह के पुत्र अखिलेश, पलिया के सुुुुभाष नगर निवासी रिजवान ने डेढ़ साल के पुत्र रेहान, नीमगांव निवासी नीरज ने डेढ़ साल के पुत्र विपिन, शांतिस्वरूप ने सात माह के पुत्र अंश, ईसानगर निवासी शिव कुमार ने 18 माह की पुत्री शिवानी एवं डायरिया होने पर पलिया निवासी धर्मेंद्र ने 12 साल की पुत्री नैंसी को चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती कराया।
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ऐसे करें बचाव
इस मौसम में निमोनिया के बैक्टीरिया प्रभावी हो जाते हैं। बंद कमरे में घर के ज्यादा लोग एक साथ न रहें। ऐसा करने से निमोनिया होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा दिन के वक्त घर की खिड़की को खोलकर रखें, जिससे हवा का आगमन होता रहे। घर में साफ सफाई रखें। बच्चों को गीला न रहने दें। बच्चों का बिस्तर और कपड़े साथ रखें।

ये लक्षण दिखने पर रहें सावधान
कोल्ड डायरिया में दस्त आना, भूख न लगना, कंपकंपी लगना, पैरों में एेंठन, सुस्ती लगना, पेट में दर्द आदि की समस्या लगने पर फौरन डॉक्टर को दिखाएं। अधिक ठंड में निमोनिया होने का खतरा बढ़ जाता है। फेफड़ों में इनफेक्शन एवं लगातार खांसी आना, सीने में घड़घड़ाहट की आवाज आना, सांस तेज चलना, चेहरा नीला पड़ना, पसली चलना और बुखार बना रहते की स्थिति में भी डॉक्टर को दिखाएं।

निमोनिया से बचाव
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी वर्मा का कहना है कि बच्चों को कई गर्म कपड़े पहनाएं। खासतौर पर एक साल तक के बच्चे को ऊनी कपड़े, मोजा, टोपा आदि पहनाए रखें। ऐसे मौसम में बच्चों को घर से बाहर न निकलने दें। सर्दी खांसी होने पर अगर बच्चा दूध नहीं पी रहा है या फिर बुखार है तो बिना लापरवाही किए डॉक्टर को दिखाएं।

सर्दी से ऐसे करें बचाव
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. विजय वर्मा का कहना है कि ऐसे मौसम में सर्दी से बचाव बेहद जरूरी है। खानपान दुरुस्त रखकर ठंड से होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि खाने में अजवाइन, सोंठ, गुड़, अदरक और हरी सब्जी में बथुआ, सोया मेथी, मूली के पत्तों का प्रयोग करें। इनकी तासीर गर्म होती है। वहीं दूध में हल्दी डालकर पीना भी फायदेमंद है।
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