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सिस्टम बेहाल- आयुष्मान योजना, पड़ी फटकार तब जागे जिम्मेदार

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लखीमपुर खीरी। गरीबों को फ्री में बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए शुरू हुई आयुष्मान योजना जिले में दम तोड़ रही है। योजना को शुरू हुए करीब 16 माह बीत रहे हैं। मगर, अब तक सिर्फ नौ प्रतिशत लाभार्थियों के ही गोल्डन कार्ड बन सके हैं। हालांकि कार्ड बनने की धीमी प्रक्रिया पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए प्रत्येक सीएचसी अधीक्षक को दस हजार कार्ड बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अधिकारियों के निरंतर मॉनिटरिंग न करने से गिनती के ही कार्ड बन सके।
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प्रधानमंत्री मोदी ने गरीबों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को की थी। इसमें जिले के 3,84,171 परिवार शामिल थे। इन सभी को गोल्डन कार्ड बनने थे, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण अब तक दस प्रतिशत लाभार्थियों के भी कार्ड बन सके। हालांकि डीएम सहित जिले के नोडल अधिकारी और कमिश्नर समय-समय पर गोल्डन कार्ड की समीक्षा करके इसमें तेजी लाने के निर्देश देते रहे। उसके बावजूद अधिकारियों ने उनके निर्देशों का संज्ञान नहीं लिया। इसका परिणाम यह रहा कि जिले में चिह्नित 3,84,171 परिवार यानि करीब 19,20,855 व्यक्तियों में से सिर्फ 1,55,500 लोगों के ही गोल्डन कार्ड बन सके।

सीएचसी अधीक्षकों के कसे पेंच
गोल्डन कार्ड बनने की धीमी प्रगति पर मुख्य सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी ने दस सीएमओ के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इससे सीएमओ कार्यालय पर अफरातफरी मच गई। कार्रवाई के डर से जिम्मेदारों ने आनन फानन में सीएचसी अधीक्षक और बीसीपीएम की बैठक बुला ली, जिसमें सीएमओ ने गोल्डन कार्ड बनाने में लापरवाही बरतने वाले अधीक्षकों को फटकार लगाते हुए एक सप्ताह में निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए।
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डीएम के निर्देश का करते पालन तो न आती ऐसी नौबत
योजना के एक साल पूरा होने पर जब डीएम ने समीक्षा की तो प्रगति काफी निराशाजनक मिली। इस पर उन्होंने सीएमओ को निर्देशित कर हर सीएचसी पर 15 दिन में दस हजार कार्ड बनवाने के निर्देश दिए। मगर, न तो अधीक्षकों ने उनके निर्देश का पालन किया और न ही सीएमओ ने पालन कराना जरूरी समझा। कार्ड को लेकर बरती गई लापरवाही से सीएमओ पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

योजना की शुरुआत: 23 सितंबर 2018
चिह्नित परिवार: 3,84,171 (करीब 1920855 व्यक्ति )
15 दिसंबर तक बने कार्ड: 1,55,500
इनका इलाज हुआ: 2645
इलाज पर कुल खर्च: 2,48,92000
जिला अस्पताल में बने कार्ड:4205
जिला अस्पताल में इलाज -370
.....
गोल्डन कार्ड-कहीं खुशी कहीं गम
गोल्डन कार्ड के लिए गांव की आशा ने अस्पताल से पात्रता की जानकारी करने को कहा था। मगर, अस्पताल आने पर भी जानकारी नहीं हो सकी। कार्ड बनाने वाले बता रहे कि वेबसाइट नहीं चल रही।
-कृष्ण गोपाल पुत्र प्रेमनरायन, निवासी गूमचीनी

आयुष्मान योजना का कार्ड होने से काफी राहत मिली। पित्त में पथरी का ऑपरेशन कराने की क्षमता नहीं थी। मगर, कार्ड के माध्यम से जिला अस्पताल में इलाज हो गया। दवाएं तक नहीं लेनी पड़ी।
-रामजानकी पत्नी हरेराम, निवासी रंगीलानगर

आयुष्मान योजना को लेकर समीक्षा बैठक बुलाई थी। कुछ सीएचसी पर कार्ड बनने की स्थिति बेहद निराशाजनक है। अधीक्षकों को कार्ड बनाने में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
-डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ

जिले में करीब एक लाख साठ हजार गोल्डन कार्ड बन जा चुके हैं। जिला, महिला सहित निजी अस्पताल में करीब 2645 लोगों को इलाज भी हो चुका है। अधिक से अधिक लोगों के कार्ड बनाने के लिए प्रयास जारी है।
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-डॉ. बीसी पंत, एसीएमओ एवं नोडल अफसर, आयुष्मान योजना
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