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होली पर बरतें सावधानी: बाजार में धड़ल्ले से बिक रहे हानिकारक रसायन युक्त रंग और गुलाल

Sat, 04 Mar 2023 03:28 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी

सार

चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपेंद्र गौतम ने बताया कि रंगों से फंगल इंफेक्शन और एलर्जी का खतरा रहता है। इससे शरीर पर चकत्ते, दाने, खुजली आदि होने लगती है।
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बाजार में लगी रंगों की दुकान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रंगों के त्योहार होली के कुछ ही दिन शेष हैं। लखीमपुर खीरी में बाजार भी रंगों से पट गया है। हानिकारक रसायन मिले सिंथेटिक रंग और गुलाल काफी सस्ते में बिक रहा है। ये रंग और गुलाल आपकी सेहत भी बिगाड़ सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि रंग, गुलाल की खरीदारी सोच-समझकर ही करें। जहां तक हो सके हर्बल रंग ही खरीदें।

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बाजार में मिलावटी रंग सस्ती दर पर बिक रहा है। एक किलो गुलाल 70 से 80 रुपये में बिक रहा है। गुलाल में मार्बल, अभ्रक, शीशा, पारा मिला होता है। रंगों का कारोबार करने वाले व्यापारी पॉलिथीन में गुलाल पैक कर बेच रहे हैं। बाजार में बिकने वाली सफेद पॉलिश (सफेदा) में सबसे अधिक केमिकल का मिश्रण होता है। जिले में करीब चार सौ क्विंटल रंग और गुलाल की खपत होती है।

काले रंग में लेड ऑक्साइड, हरे में कॉपर सल्फेट

सीनियर फिजिशियन डॉ. अनीशुल हसन अंसारी बताते हैं कि रंगों में शीशा, कॉपर, पारा, एल्युमिनियम ब्रोमाइड अभ्रक और स्बेस्टस आदि रसायनिक तत्वों की मिलावट की जाती है। इससे त्वचा का कैंसर, अंधापन और बहरेपन का खतरा रहता है। इसके अलावा यह रंग शरीर के अंदरूनी अंगों पर भी घातक प्रभाव डालते हैं। 

उनका कहना है कि काले रंग में लेड ऑक्साइड होता है, जो शरीर रिसकर अंदर चला जाए तो किडनी भी खराब कर सकता है। हरे रंग में कॉपर सल्फेट होता है। इससे आंख और चेहरे पर सूजन आ जाती है, एलर्जी भी हो जाती है। सिल्वर रंग से स्किन कैंसर का खतरा रहता है। 

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नीले रंग से सफेद रंग का दाग हो सकता है। त्वचा पर एलर्जी हो सकती है। लाल रंग में मरक्यूरी सल्फाइड होता है, जो स्किन कैंसर के लिए जिम्मेदार होता है। मिलावटी गुलाल से भी सेहत पर असर पड़ता है। इससे फेफड़ों की बीमारी का खतरा बना रहता है। स्टार्च भी रंग के साथ हानिकारक होता है।
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रंगों से फंगल इंफेक्शन और एलर्जी का भी खतरा

चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपेंद्र गौतम ने बताया कि रंगों से फंगल इंफेक्शन और एलर्जी का खतरा रहता है। इससे शरीर पर चकत्ते, दाने, खुजली आदि होने लगती है। रंग पड़ने के बाद तत्काल साबुन से धोएं और पूरी तरह सुखाने के बाद ही एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं। आराम न मिले तो डॉक्टर के पास जरूर जाएं। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम वर्मा ने कहा कि रंगों से आंखों को बचाना चाहिए। प्राय: आंख में रंग पड़ने से कॉर्निया जाने का खतरा होता है। सावधानी न बरतने से आंखों में जलन, धुंधला दिखाई देने की आशंका रहती है।
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