जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए लगी मरीजों की लाइन। संवाद
लखीमपुर खीरी। मेडिकल कॉलेज अधीन जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की अल्ट्रासाउंड जांच तो नियमित रूप से हो रही है, लेकिन उन्हें जांच रिपोर्ट कंप्यूटर प्रिंटआउट के बजाय साधारण कागज पर हाथ से लिखकर दी जा रही है। इससे प्रसूताओं को रिपोर्ट समझने, सुरक्षित रखने और अन्य चिकित्सकों को दिखाने में कठिनाई हो रही है।
अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 300 से 400 मरीज पहुंचते हैं। इनमें लगभग 80 से 100 गर्भवतियों का अल्ट्रासाउंड किया जाता है। अस्पताल में लगी पोर्टेबल मशीन से जांच के बाद रिपोर्ट का प्रिंट नहीं निकल पाता, इसलिए चिकित्सकों को हस्तलिखित रिपोर्ट देनी पड़ रही है।
वहीं गर्भवतियों का कहना है कि कई बार बाहर जाने पर किसी चिकित्सक को दिखाने पर रिपोर्ट स्पष्ट नहीं हो पाती है। इससे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्रिंटिड रिपोर्ट मिलने से उसे रखने व समझने में सुविधा रहती है।
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गर्भावस्था के दौरान कई बार जांच हो चुकी है। हर बार पर्चे पर लिखी रिपोर्ट ही मिलती है। प्रिंटेड रिपोर्ट होने से जांच का रिकॉर्ड भी आसानी से सुरक्षित रखा जा सकता है।
मनोरमा, अमृतागंज
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जांच के बाद हाथ से लिखी रिपोर्ट मिली। लिखावट स्पष्ट न होने के कारण परिवार के लोग भी रिपोर्ट में दर्ज जानकारी नहीं समझ पाए। कंप्यूटर से निकली रिपोर्ट अधिक विश्वसनीय और सुविधाजनक होती है।
सरिता, प्यारेपुर
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प्रिंटिड रिपोर्ट में गलतियां होने की आशंका बनी रहती है। हालांकि रेडियोलॉजिस्ट की लिखावट की वजह से महिला अस्पताल के चिकित्सकों को कोई दिक्कत नहीं होती है, इसलिए इसे मैनुअल ही रखा गया है।
डॉ. वाणी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज