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हथकरघा उद्योग से समूहों की 1200 महिलाएं जुड़ीं

Thu, 04 Jun 2015 06:45 PM IST
लखीमपुर खीरी।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत थारू क्षेत्रों में हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने और समूह बनाकर थारू जनजाति के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रशासन की कोशिशों को बड़ी सफलता मिली है। प्रशासन के सहयोग के बाद पलिया क्षेत्र में समूहों के गठन में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पूर्व में गठित 61 समूहों के बाद इस क्षेत्र में 50 नए समूह गठित कर लिए गए हैं। जिनसे 1200 महिलाएं जुड़ चुकी हैं। इन महिलाओं को प्रोत्साहन देने और जूट से बने उत्पादों की बिक्री के लिए विकास भवन में दो दुकानें थारू जनजाति के लिए आवंटित कर दी गई हैं।
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मुख्य विकास अधिकारी नितीश कुमार ने बताया कि पलिया ब्लाक के थारू जनजाति क्षेत्र में पूर्व में गठित 61 समूहों को जूट से बनने वाले पारंपरिक उत्पादों जैसे दरी, थैली, बैग के उत्पादन के लिए 15-15 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई है। सीडीओ ने बताया कि चंदनचौकी क्षेत्र में परियोजना के अंतर्गत वर्ष 1995 से बंद पड़े भवन की मरम्मत कराई गई है, जहां दस-दस के ग्रुप में जुड़ी महिलाएं जूट के उत्पादों को तैयार कर रही हैं। इन समूहों की सक्रियता को देखते हुए पचास समूह और बना लिए गए हैं। जिन्हें पलिया क्षेत्र में ही कच्चा माल उपलब्ध कराने को लेकर जूट बोने को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीडीओ ने बताया कि समूहों द्वारा निर्मित जूट के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की कवायद भी शुरू की गई है। जिसके तहत विकास भवन में दो दुकानों का आवंटन किया जा चुका है और लखनऊ में एक दुकान उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। सीडीओ के मुताबिक जो समूह बाहर से कच्चा माल लाते हैं या अपने उत्पादों को बाहरी बाजार में बेचने जाते हैं, उन्हें 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी और वाहन भी उपलब्ध कराया जाएगा।
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