गांव गंगानगर में 10 एकड़ जमीन को फर्जी तरीके से दूसरे के नाम करने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने रिटायर्ड तहसीलदार और वर्तमान तहसीलदार समेत आधा दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए हैं। एसओ ने देर रात तक रिपोर्ट दर्ज कर न्यायालय में पेश करने की बात कही है।
गंगानगर निवासी संदीप कौर पत्नी लखविंदर सिंह ने बताया कि उसने 10 एकड़ जमीन गांव के ही रतन सिंह से 15.11. 2007 को खरीदी थी, जिसका दाखिल खारिज भी हो गया था। आरोप है कि एक शिकायती पत्र पर तत्कालीन तहसीलदार ने संदीप कौर का नाम काटकर गांव के ही मलकीत सिंह पुत्री बंता सिंह के नाम जमीन कर दी। उसके बाद वह तहसीलदार सेवानिवृत्त हो गए। नायब तहसीलदार रामनरायन को तहसीलदार का प्रभार सौंपा गया। नायब तहसीलदार ने मामले को गलत देखकर एक बार फिर 19 जनवरी 2015 को मलकीत सिंह का नाम हटाकर संदीप कौर के नाम जमीन का आर्डर कर दिया। आरोप है कि तहसीलदार जगदीश सिंह ने कार्यभार ग्रहण करते ही उस जमीन को बिना साक्ष्य के पारितोषिक लेकर मलकीत सिंह के नाम दर्ज कर दिया। इस बाबत संदीप कौर ने मामले की शिकायत एसडीएम से लेकर डीएम तक से की, लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनीं। आरोप है कि तहसीलदार और अन्य लोगों ने मिलकर उसे जान से मारने की धमकी भी दी। बाद में उसने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर रिटायर्ड तहसीलदार रामऔतार, वर्तमान तहसीलदार जगदीश सिंह, गंगानगर निवासी पमरजीत सिंह, मलकीत कौर समेत तीन-चार अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए हैं। एसओ अमर सिंह ने बताया कि देर शाम आदेश मिलने के कारण रिपोर्ट नहीं लिखी गई है। शीघ्र ही रिपोर्ट दर्ज कर न्यायालय में कागज भेजे जाएंगे।
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एक बार फिर फंसे रिटायर्ड तहसीलदार
बाढ़ राहत चेक घोटाले में रिटायर्ड तहसीलदार रामऔतार और लेखपाल छत्रपाल समेत चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी कर धन का दुरुपयोग करने के मामले में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। इस मामले में चार लोग जेल जा चुके हैं। रामऔतार और लेखपाल को गिरफ्तार करने के आदेश भी न्यायालय ने दिया है, लेकिन ये लोग अब भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं।