लखीमपुर खीरी। सोमवार को आषाढ़ माह की पूर्णिमा है। इस दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। देवकली तीर्थ परिसर में भी कार्यक्रम होगा।
गुरु पूर्णिमा पर्व शिष्यों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन शिष्य अपने अध्यात्मिक एवं शैक्षिक गुरुओं का पूजन करते हैं, क्योंकि गुरु के बिना हर किसी का जीवन अधूरा है। गुरु ही सही और गलत मार्ग का अंतर बताते हैं। देवकली स्थित श्रीमती चंद्रकला आश्रम के महंत प्रमोद दीक्षित ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के दिन ही वेदव्यास ने कई पुराणों, उप पुराणों व महाभारत की रचना भी इसी दिन पूरी की थी। इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि स्वयं भगवान शिव ने कहा कि गुरु ही देव हैं, गुरु ही धर्म हैं, गुरु में निष्ठा ही परम धर्म है। गुरु से अधिक और कुछ नहीं है।
उन्हाेंने बताया कि गुरु पूर्णिमा से अगले चार माह अध्ययन के लिए बड़े ही उपयुक्त माने जाते हैं। साधु संत भी इस दौरान एक स्थान पर रहकर ध्यान लगाते हैं। इसदिन सभी लोगों को अपने गुरुओं से आशीर्वाद लेना चाहिए। आज के दिन गुरु का पूजन करने वाले भक्तों पर ईश्वर भी अपनी कृपा बनाए रहते हैं।
शुभ मुहूर्त
गुरु पूर्णिमा तिथि आरंभ- दो जुलाई की रात आठ बजकर 21 मिनट से तीन जुलाई की शाम पांच बजकर आठ मिनट पर।