जिले भर में गोवर्धन और अन्नकूट का पर्व परंपरागत ढंग से मनाया गया। कहीं दिन में तो कहीं रात में गोधन महाराज की पूजा की गई। गाय के गोबर से आंगन और गलियारों में गोवर्धन गिरधारी की प्रतिमा बनाकर परिवार और पड़ोसियों के साथ पूजा-अर्चना की। कहीं दही से तो कहीं खील-खिलौनों से पूजा की गई। गोबर की गायें बनाकर, दही चलाने वाली, ग्वालवाल आदि की झांकियां बनाई गईं। सीकों और रुई से इन झांकियों को सजाया गया। महिलाओं ने अपने परिवार की खुशहाली के लिए मन्नतें मांगी। इसके बाद आरती करके प्रसाद बांटा गया।
गोला गोकर्णनाथ। महिलाओं ने अन्नकूट और गोवर्धन पूजा पर घरों में गोबर से घरौंदे बनाकर पूजन किया। भगवान श्रीकृष्ण की कथा सुनकर घर में सुख समृद्धि की कामना की।
ममरी। दीपावली के अगले दिन महिलाओं ने अपने घरों में गोबर के खिलौने और घरौंदे बनाकर भगवान गोवर्धन का दीप जलाकर और अन्न चढ़ाकर विधि विधान से पूजन किया।
बांकेगंज। कस्बा में गोवर्धन उत्सव धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया। पुरोहित कुसुम शास्त्री ने ठाकुर जी महराज को अन्नकूट का भोग लगाया गया। गोवर्धन और अन्नकूट उत्सव के मौके पर मंदिर प्रांगण को रंग-बिरंगी बिजली झालरों से सजाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से गोवर्धन पूजन के बाद परिक्रमा की। महिलाओं ने सारे दिन व्रत धारण कर गोधूलि बेला में गोवर्धन पूजन किया।
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फोटो लाइन. 12जीएलए.बीकेजी1ए2. बांकेगंज के राधाकृष्ण मंदिर में गोवर्धन पूजा करते श्रद्घालु।
02. बांकेगंज में श्रद्घालुओं ने घरों में बनाया आकर्षक गोवर्धन पर्वत।