लखीमपुर खीरी। नकहा ब्लॉक की ग्राम पंचायत बड़ागांव में ग्राम पंचायत सदस्यों के फर्जी अंगूठे लगाकर 5.50 लाख रुपये के गोलमाल का मामला सामने आया है। एक सप्ताह के अंदर छह बिलों के माध्यम से ग्राम निधि से यह रकम निकाली गई। इस धनराशि से सस्ती दर पर 100 स्ट्रीट लाइट लगवाई गईं, जो अब खराब हो चुकी हैं। जांच में प्रधान और सचिव दोषी पाए गए हैैं। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने प्रधान अनुज माधुरी को नोटिस देकर 15 दिन के अंदर जवाब मांगा है। वहीं डीपीआरओ मनोज कुमार यादव ने तत्कालीन सचिव नरेंद्र यादव को नोटिस जारी की है, इनकी तैनाती इस समय ईसानगर ब्लॉक में है।
ग्राम पंचायत बड़ागांव निवासी आमीन, आसमुन आदि ने प्रधान के खिलाफ शिकायत कर प्रस्ताव पर उनके फर्जी अंगूठे लगाए जाने का आरोप लगाया था, जिसके बाद डीएम ने सहायक निदेशक मत्स्य से जांच कराई। जांच में कार्यवाही रजिस्टर पर ग्राम पंचायत सदस्य आमीन, आसमुन और श्रीमती के अंगूठा निशान फर्जी पाए गए। ग्राम पंचायत और ग्राम सभा की बैठकों में प्रस्तावों पर ग्राम पंचायत सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं कराए, बल्कि निशानी अंगूठे लगाए गए। आरोप है कि प्रधान और सचिव ने स्वयं ही हस्ताक्षर बना दिए, जो ग्राम पंचायत सदस्यों के साथ धोखाधड़ी है। डीपीआरओ मनोज कुमार ने बताया कि प्रधान और सचिव ने एक मार्च 2017 से छह मार्च 2017 तक फर्म वर्मा कम्युनिकेशन के छह बिलों के माध्यम से 100 स्ट्रीट लाइट की खरीद के लिए 5.50 लाख रुपये का भुगतान किया था। एक मार्च को तीन बिलों के माध्यम से 50 स्ट्रीट लाइटों के एवज में 2.75 लाख भुगतान किया गया। इसी तरह दो दिन बाद चार मार्च को 18 स्ट्रीट लाइट के लिए 99 हजार और छह मार्च 2017 को 32 स्ट्रीट लाइट के लिए 1.76 लाख रुपये भुगतान किया गया। सभी स्ट्रीट लाइट जन कुटेशन के आधार पर खरीदी गईं, जबकि भंडार क्रय नियम संख्या 03 (ग) के अनुसार एक लाख से अधिक मूल्य की सामग्री क्रय करने के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य है। इसके उलट प्रधान और सचिव ने कोटेशन प्रक्रिया अपनाई, जिससे दोनों भंडार क्रय नियम संख्या 03 (ग) के उल्लंघन के दोषी पाए गए हैं। वहीं गांव में लगाई गईं खराब गुणवत्ता वाली स्ट्रीट लाइटें खराब भी इस समय खराब हैं।
प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार होंगे प्रतिबंधित
डीएम ने प्रधान को भेजी नोटिस में 15 दिन के अंदर सही जवाब न मिलने पर कार्रवाई करने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 95 (1) (छ) के तहत प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार प्रतिबंधित उसे हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
सचिव से 15 दिन के अंदर बिंदुवार साक्ष्यों सहित स्पष्टीकरण मांगा है। स्पष्टीकरण संतोषजनक न होने पर सचिव के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और दुरुपयोग की गई धनराशि की वसूली वेतन से कर ली जाएगी।
-मनोज कुमार यादव, प्रभारी डीपीआरओ