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Lakhimpur Kheri News: सहकारी समितियों के गोदाम खाली, जिले भर में हाहाकार

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असगवां सहकारी समित
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लखीमपुर खीरी। एक तरफ किसान कम बारिश होने से परेशान हैं, तो दूसरी तरफ सहकारी समितियों पर खाद न मिल पाने से हलाकान हैं। अफसरों का दावा है कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं है मगर समितियों के गोदाम खाली पड़े हैं।
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किसान अपना आधा समय तो सहकारी समितियों के चक्कर लगाने में बिता रहे हैं, फिर भी खाद नहीं मिल पा रही है। जिले की कुछ सहकारी समितियों पर ही खाद उपलब्ध है, बाकी गोदाम खाली पड़े हैं। समितियों पर इफको, कृभको की खाद नदारद है। प्राइवेट दुकानदार किसानों को 280 से लेकर तीन सौ रुपये तक में खाद बेच रहे हैं। इसकी शुद्धता की भी कोई गारंटी नहीं है। ऐसे में किसान दोतरफा ठगा जा रहा है।

प्राइवेट दुकानों से खाद खरीदो तो जिंक भी लो
मितौली। कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्रों की सहकारी समितियों पर यूरिया की किल्लत है। इससे गन्ना व धान की फसल प्रभावित हो रही है। मितौली की किसान सेवा सहकारी समिति लिमिटेड पर 16-17 जुलाई को कुल 1200 बोरी यूरिया खाद आई थी, जो बिक चुकी है। समिति से 15 दिन पहले यूरिया खाद की आपूर्ति के लिए 1200 बोरी यूरिया के लिए पीसीएफ को चेक भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक यूरिया खाद समिति पर नही पहुंची है। बबौना समिति पर एक सप्ताह से यूरिया उपलब्ध नहीं है। संडिलवा में दो दिन से और अबगांवा समिति पर एक महीने से यूरिया उपलब्ध नहीं है। पिपरझला समिति पर दो महीने से यूरिया खाद नहीं है। प्राइवेट दुकानों पर यूरिया के साथ न चाहते हुए अन्य सामान लेना पड़ रहा है। सामान में जिंक न लेने पर रेट बढ़ाकर यूरिया दी जा रही है।
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समितियों से बाजार तक चक्कर लगा रहे किसान
मोहम्मदी। साधन सहकारी समिति गुलरिया परवसतनगर, राजापुर बेनी, दिलावरपुर आदि समितियों पर डीएपी, यूरिया खाद न मिलने से किसान परेशान हैं। बबौरी के किसान दिनेश वर्मा का कहना है कि इस समय यूरिया का बहुत जरूरत है। खाद न पड़ने से फसल की पैदावार में फर्क पड़ेगा। खजुहा के किसान गौतम कहते हैं कि खाद लेने के लिए वह लगातार चक्कर लगा रहे हैं। गन्ना सोसायटी दिलावरपुर के बड़े बाबू ने बताया कि यूरिया खाद नहीं आई है।

समितियों ने चेक लगाए आपूर्ति नहीं हो रही
बिजुआ। दाउदपुर, गोंधिया, पडरिया तुला, बस्तौली, बिजुआ समितियों के सचिवों ने बताया कि काफी दिन से चेक लगा रखे हैं लेकिन खाद नहीं मिल पा रही है। किसी समिति में एक ट्रक खाद आ भी जाती है तो उस समिति के किसानों और पड़ोस के किसानों को आवंटित कर दी जाती है। एडीओ कोआपरेटिव यशवंत सिंह ने बताया कि नौ में से चार समितियों रमुआपुर, भदेड, भीरा, भानपुर में खाद उपलब्ध है।

क्या कहते हैं किसान
मितौली कस्बे के रहने वाले किसान अंकित कुमार ने बताया की उसकी तीन बीघा गन्ने की फसल में यूरिया खाद की आवश्यकता है। मितौली समिति पर दो दिन से जा रहे है मगर खाद नहीं है। मजबूरन बाहर से यूरिया खरीदनी पड़ेगी।



कस्ता समिति क्षेत्र के डलुवापुर गांव के निवासी सूबेदार सिंह ने बताया कि कई दिनों से यूरिया को लेकर समिति के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन खाद नहीं मिल पा रही है। मजबूर होकर बाहर की दुकानों से खाद खरीद ली है। समिति पर खाद नहीं है।



अबगांवा समिति क्षेत्र के पचदेवरा के निवासी मनोज कुमार ने बताया कि समिति पर एक माह से यूरिया खाद नहीं है। किसानों को खाद न मिलने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बाहर की दुकानों से खाद लेनी पड़ रही है।

पिरपरझला समिति क्षेत्र के पिपरझला निवासी अमर सिंह ने बताया कि समिति पर दो माह से यूरिया खाद की किल्लत है। किसान परेशान हैं। किसानों को प्राइवेट दुकानों से महंगे दामों में यूरिया खरीदनी पड़ रही है। समित पर दो माह से खाद नहीं है।

जिले में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है। सहकारी समितियों पर 5175 मीट्रिक टन यूरिया, 2553 मीट्रिक टन डीएपी, 1536 मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है। सहकारी बफर गोदाम में 1000 मीट्रिक टन यूरिया, 5100 मीट्रिक टन डीएपी और 7000 मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है।
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- अरविंद कुमार चौधरी, जिला कृषि अधिकारी

असगवां सहकारी समित

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