गोला गोकर्णनाथ। छोटी काशी में मां पार्वती का देवालय मां मंगला देवी के नाम से विख्यात है। मंदिर में स्थापित काले पत्थर की चमत्कारी प्रतिमा सजीव प्रतीत होती है। नवरात्र में यहां नगर और दूरदराज से आए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
छोटी काशी पर शोध प्रबंध लिख रहे साहित्यकार लोकेश कुमार गुप्त ने बताया कि मत्स्य पुराण में वर्णन है कि पिता दक्ष के यज्ञ में शिवजी की पत्नी सती बिना आमंत्रण के पहुंची और शिवजी का स्थान न देखकर क्रोधित होकर योग बल से प्रज्वलित अग्नि में खुद को भस्म कर दिया था। जलती हुईं सती से दक्ष ने पूछा तो उन्होंने कामना सिद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए 108 तीर्थ स्थलों का वर्णन किया। उनमें गोकर्ण तीर्थ में भद्रकर्णिका नाम से अपने को स्थापित बताया।
मां मंगला ही हैं देवी भद्रकर्णिका
खुटार मार्ग के पास स्थित मंदिर में माता भद्रकर्णिका की चतुर्भुजी प्रतिमा है। भक्तों की यहां कामना पूर्ण होने लगी तो उनका नाम मां मंगला रख दिया गया। मान्यता है कि यहां पूजन-दर्शन करने से भक्तों के संकट हर जाते हैं। ऐसी ही एक घटना लगभग 45 वर्ष पूर्व हुई थी। वर्षा काल में बिजली गिरी लेकिन वह किसी के घर पर नहीं, माता के मंदिर पर गिरी थी। जिससे मंदिर का शिखर ध्वस्त हो गया था। तब से लोगों में देवी मां के प्रति श्रद्धा भाव और भी बढ़ गया है।