ईसानगर/खमरिया (लखीमपुर खीरी)। कोरोना संकट से जूझ रहे देश में जहां केंद्र से लेकर राज्य सरकार आम जन की सुरक्षा के लिए बेहद गंभीर है, वहीं गोवंश को लेकर सिस्टम लापरवाह बना हुआ है। इसी के चलते ईसानगर ब्लॉक की महरिया गोशाला में दो दिन में दो गायों की मौत हो गई, जबकि आठ गायें बीमार हैं। डॉक्टरों ने बताया कि नया भूसा आया है, जिसे खाकर गायें बीमार हुई हैं। उनके मुताबिक एक तो मौसम गर्म है, दूसरे नया भूसा भी गर्म होता है। हरा चारा मिल नहीं रहा है। बीमार गायों का इलाज किया जा रहा है।
ग्राम पंचायत महरिया स्थित अस्थायी गोशाला में 218 गायें हैैं। यहां गायों को केवल सूखा भूसा नसीब हो रहा है। अव्यवस्थाओं के कारण गायें भुखमरी का शिकार हो रही हैं, जिसमें दो दिन में दो गायों ने दम तोड़ दिया। जबकि आठ गायें गंभीर रूप से बीमार हैं। यहां तैनात पांच सेवादार भी अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहे हैं, जिस कारण बीमार गायों की देखभाल भी ढंग से नहीं हो पा रही है। पशु चिकित्सक डॉ प्रदीप कुमार ने बताया कि नया भूसा खाने के लिए गायों को दिया जा रहा है, जो गर्म होने के कारण उन्हें बीमार कर रहा है। हरे चारे की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। दो गायों की मौत हुई है। करीब आधा दर्जन गायें बीमार हैं, जिनका इलाज किया जा रहा है।
गोशाला में लगी चारा मशीन बनी शोपीस
महरिया स्थित अस्थायी गोशाला में मवेशियों को भूसा में हरा चारा मिलाकर खिलाने के लिए चारा मशीन लगाई गई है, जो महज शोपीस बनकर रह गई है। मवेशियों को हरा चारा न मिलने और सूखे भूसे से पेट भरने के कारण शारीरिक दुर्बलता के कारण दर्जनों गायें मौत की चौखट तक पहुंच गई हैं।
गोआश्रय स्थलों पर पशुओं के चारे के लिए समुचित प्रबंध किए गए हैैं। इसके लिए बजट की कोई कमी नहीं है। फिर भी कहीं गड़बड़ी मिलती है, तो संबंधित के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
-शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम
गायों के मरने की सूचना नहीं है। कुछ गायें बीमार हैं, जिनका इलाज कराया जा रहा है। लेखपाल और कानून गो को भेजकर नियमित जांच कराई जाती है।
-एस सुधारकरण, एसडीएम, धौरहरा
गायों की सुरक्षा के लिए पांच सेवादार रखे गए हैं। हरे चारे की कमी है, जिसके लिए मक्के की बुवाई कराई गई है। तैयार होने पर भूसे के साथ हरा चारा मिक्स करके खिलाया जाएगा। जांच के लिए पशु चिकित्सक नियमित आते हैं।
-कपिल वर्मा, प्रधान, महरिया
मामला संज्ञान में आया है। गायों की मौत की जांच कराई जाएगी। बजट की कमी नहीं है। 10 अप्रैल को ही गोशालाओं को बजट दिया जा चुका है। किसी का बकाया भी नहीं है।
-डॉ टीके तिवारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी