फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भुगतान के लिए जीएम केन को बनाया बंधक

Mon, 01 Feb 2016 10:32 PM IST
पलियाकलां।
विज्ञापन
विज्ञापन
गन्ना मूल्य भुगतान और नया गन्ना मूल्य घोषित करने के लिए किसान अब आंदोलन की राह पर उतर आए हैं। किसानों ने वार्ता करने आए जीएम केन और एक अन्य अधिकारी को घंटों बंधक बनाकर अपने साथ धरने पर बैठाए रखा और भुगतान न होने तक छोड़ने का एलान कर दिया। जीएम केन को छुड़ाने में किसानों की पुलिस से जमकर धक्कामुक्की और नोकझोंक हुई और पुलिस के पसीने छूट गए। किसानों ने एसडीएम से कहा कि उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दें लेकिन एसडीएम ने ऐसा करने से मना कर दिया। इससे पहले शहर में जुलूस निकाल कर पलिया चीनी मिल के सामने बैठकर जाम लगा दिया जिससे पलिया-भीरा मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गई। शाम तक जाम न खुलने पर भारी फोर्स बुला ली गई और पुलिस बल ने किसानों को जबरन हटाया। रात करीब साढ़े आठ बजे जाम खुला लेकिन किसान धरने पर बैठे थे। जाम जाम खुलने के बाद भी स्थिति सामान्य होने में दो घंटे से अधिक समय लग गया।
विज्ञापन

किसानों ने नए सत्र में महज गन्ना भुगतान न होने  और गन्ना मूल्य न बढ़ाए जाने के विरोध में सोमवार को चक्काजाम और घेराव का एलान किया था। सोमवार को किसान सहकारी गन्ना विकास समिति में एकत्र हुए और यहां बैठक की। बैठक के बाद किसान सहकारी गन्ना विकास समिति चेयरमैन विकास कपूर विक्की, उपाध्यक्ष बुंदू मियां, किसान मजदूर पार्टी के अध्यक्ष मनप्रीत सिंह, उपाध्यक्ष हैप्पी सिंह आदि के नेतृत्व में जुलूस दोपहर एक बजे चीनी मिल गेट पहुंचा। किसानों ने यहां पलिया भीरा मार्ग को जाम कर दिया।
इस पर चीनी मिल के जीएम केन ओपी चौहान और एक अधिकारी किसानों से वहां वार्ता करने आए। किसान जीएम केन की दलीलों से सहमत न हुए और उन्होंने उनको घेरे में लेकर धरने पर बैठा लिया। जीएम केन को बंधक बनाने की सूचना पर एसडीएम आलोक वर्मा धरना स्थल पर पहुंचे और किसानों को समझाया लेकिन किसान नहीं माने। पुलिस ने जीएम केन को वहां से निकालना चाहा तो किसानों से धक्कामुक्की होने लगी। एसडीएम ने किसी तरह उन्हें निकाला। इसके बाद किसान गिरफ्तारी देने पर अड़ गए लेकिन एसडीएम ने मना कर दिया। एसडीएम ने कहा कि किसान मिल के उच्चाधिकारियों से बात करना चाहते थे और इसीलिए उन्हें भेजा गया है। किसान हित में सभी सोच रहे हैं और वार्ता के जरिए ही हल निकल सकता है।
विज्ञापन

जीएम केन को छुड़ाए जाने के बाद किसान धरने पर बैठे रहे। इस बीच मिल प्रबंधन ने किसानों के पास लिखित प्रस्ताव भेजा कि वह बुधवार तक दस करोड़ रुपये किसानों के खाते में भेज देंगी। इसके अलावा चीनी फ्री कर दे रहे हैं। जो किसान गन्ना मूल्य के बदले चीनी लेना चाहें उन्हें चीनी दे दी जाएगी। किसानों ने इस प्रस्ताव को इंकार कर दिया। दोपहर एक बजे से जाम के कारण पलिया भीरा पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया तो रात फोर्स मंगा ली गई। पुलिस ने रात करीब साढ़े आठ बजे बल प्रयोग कर जाम लगा रहे किसानों को खदेड़ा। इसके बाद जाम खुल सका। किसान अभी भी धरने पर बैठे हैं।
सरकार केवल आश्वासन दे रही, किसान मर रहा
किसानों को संबोधित करते हुए विकास कपूर ने कहा कि मिल-सरकार केवल आश्वासन दे रही है और किसान मर रहा है। किमस विधानसभाध्यक्ष मनप्रीत सिंह ने कहा कि मिल प्रबंधन किसानों को बेवकूफ बना रहा है। वह इस बार भी भुगतान नहीं करना चाहता। किसानों ने मांग की कि चीनी मिल उन्हें 14 दिन छोड़कर समस्त भुगतान करें। इसके बाद यही गैप लागू रहे ताकि सीजन बंद हो जाने पर किसानों को परेशानी न उठानी पड़े।

तीन दिसंबर तक का ही भुगतान
चीनी मिल 26 नवंबर को शुरू हुई थी। मिल छह दिसंबर तक का भुगतान करने की बात कह रही है। किसान केवल तीन दिसंबर तक का ही भुगतान किए जाने की बात कह रहे हैं। किसानों का कहना है कि अपने खर्चों तक के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है।

यह है नियम
नियमों के मुताबिक मिल जितनी चीनी की पेराई करती है उसका 85 प्रतिशत भुगतान होना चाहिए पर ऐसा नहीं हो रहा है। बताया गया है कि मिल ने अभी 63 लाख क्विंतल गन्ने की पेराई की है और करीब 16 करोड़  का ही भुगतान किया है। नियम के मुताबिक 15794.18 लाख रुपए का भुगतान अभी भी बाकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें