उनके अनुसार कुछ दिन के अभ्यास के बाद चश्मा लगाने वाला दृष्टि दिव्यांग व्यक्ति घंटी बजने पर दरवाजा खोलना, पहचान वाले शख्स को ही अंदर आने देना और दैनिक क्रियाएं खुद करना आसानी से सीख जाएगा। जैसे-जैसे डाटाबेस बढ़ता जाएगा, चश्मा लगाने वाले दृष्टि दिव्यांगजनों के लिए सहूलियत बढ़ती जाएगी। वह अपने आप तय समय पर तय जगह रखी दवाई तक ले सकेगा।
12 से 15 हजार रुपये रहेगी कीमत
दृष्टि दिव्यांगजनों के लिए तैयार किया गया यह चश्मा भारतीय बाजार में 12 से 15 हजार रुपये में उपलब्ध होगा। इसके लिए मुनीर ने कैडर टेक्नोलॉजी सर्विसेज एलएलसी नामक कंपनी की स्थापना की है। कैडर टेक (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड नाम से इसका एक ऑफिस नवी मुंबई महाराष्ट्र में खोला है।
आईआईटी मुंबई में हुआ चश्मे का ट्रायल
मुनीर ने बताया कि 17 से 19 दिसंबर तक चलने वाले एशिया के सबसे बड़े तकनीकी उत्सव में आईआईटी मुंबई में लोग इस चश्मे की कार्यप्रणाली और तकनीकी की जांच कर रहे हैं। इस दौरान मंगलवार को पहले दिन महाराष्ट्र के विभिन्न भागों से कई परिवार कुछ दृष्टि दिव्यांगजनों के साथ आए और चश्मे को लगाकर टेस्ट किया है। लोगों ने इसके ट्रायल के बाद अच्छा फीडबैक दिया।