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एक तो घोटाला, फिर उसमें भी किया फर्जीवाड़ा

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लखीमपुर खीरी। सरकारी गेहूं खरीद में नेफेड के क्रय केंद्र दाउदपुर में 10.58 लाख के गेहूं गबन के मामले में चौकाने वाली बात सामने आई है। नेफेड के जिला प्रबंधक ने अपने मकान मालिक के बीएड की पढ़ाई कर रहे बेटे को भी इस घोटाले में फंसा दिया। प्रबंधक की मर्जी से केंद्र प्रभारी ने घोटाले संबंधी कागजों में इस छात्र के नाम से हस्ताक्षर बना दिए। अब एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की तो छात्र को इसकी जानकारी हुई, तब वह मंगलवार को एसपी से मिला। एसपी ने उसे मामले से नाम निकलवाने का भरोसा दिया है।
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वर्ष 2018-19 की गेहूं खरीद में नेफेड ने दाउदपुर में गेहूं क्रय केंद्र पर उसी गांव के रहने वाले मुश्ताक खां को केंद्र प्रभारी बनाया था। कुछ समय बाद अचानक तीन मई 2019 को क्रय केंद्र बंद कर दिया गया। इसके बाद 27 अगस्त 2019 को चार किसानों गांव सिसौरा निवासी कल्पना मिश्रा ने 115 क्विंटल, सिसौरा निवासी राकेश कुमार ने 209 क्विंटल, सिसौरा निवासी विक्रम मिश्रा ने 194 क्विंटल और मीना देवी पत्नी राकेश कुमार ने 45 क्विंटल गेहूं क्रय केंद्र पर बेचने के बाद भुगतान न मिलने की शिकायत एडीएम से की थी। चार किसानों के 563 क्विंटल गेहूं के गबन का मामला सामने आने पर एडीएम ने एआरओ (क्षेत्रीय विपणन अधिकारी) प्रमोद कुमार गुप्ता से जांच कराई। जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर नेफेड के जिला प्रबंधक राजेश कुमार वर्मा, केंद्र प्रभारी मुश्ताक खां, शोभित मिश्रा और बघ्घे के खिलाफ दस दिन पहले फूलबेहड़ थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
इस एफआईआर में शामिल मोहल्ला कमलापुर निवासी शोभित मिश्रा का भी नाम शामिल था। जांच के दौरान नेफेड के अधिकारियों ने उसे केंद्र प्रभारी बताया था। उसका नाम दरअसल इसलिए सामने आया क्योंकि घोटाले के शिकार हुए किसानों को दी गई सिक्स आर पर्ची में शोभित मिश्रा के नाम के हस्ताक्षर थे। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की तो शोभित तक पुलिस पहुंची, तब उसे जानकारी हुई। इसके बाद मंगलवार को शोभित एसपी से मिला और बताया कि नेफेड के जिला प्रबंधक राजेश कुमार वर्मा उसके मकान में किराए पर रहते हैं। वर्मा ने उसे केंद्र प्रभारी बनाने की एक बार बात कही थी, मगर मगर कुछ हुआ नहीं। इसी बातचीत में उसका नाम दिमाग में आने पर वर्मा और केंद्र प्रभारी मुश्ताक खां ने उसका नाम संबंधित कागजों में केंद्र प्रभारी के रूप में लिखकर उसके नाम से हस्ताक्षर कर दिए। जबकि वह बीएड का छात्र है और इसके अलावा नेफेड से कोई वास्ता नहीं है। एसपी ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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