अखिल विश्व गायत्री परिवार एवं शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ हवन पूजन के साथ शुरू हुआ, जिसमें सैकड़ों साधकों ने आहुतियां डालकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
अरुणांचल प्रदेश से आए कंचन जी ने महायज्ञ में देव आह्वान कर वेदियों का पूजन कराया। उन्होंने कहा कि गायत्री महामंत्र से ही सभी देवों की आराधना होती है। उन्होंने कहा कि गायत्री सदबुद्धि की देवी और यज्ञ सत्कर्मों का पिता है। सद्भावनाओं एवं सत्प्रवृत्तियों के अभिवर्द्धन के लिए गायत्री माता और यज्ञ पिता का युग्म हर दृष्टि से सफल एवं समर्थ सिद्ध हो सकता है। इस मौके पर यज्ञ में शहीद सैनिकों की याद में भी आहुतियां डाली गईं। संगीत बद्ध भजनों की श्रृंखला कौशल जी द्वारा प्रस्तुत की जा रही है। 17 नवंबर को भी यज्ञ आहुतियों का सिलसिला जारी रहेगा। 18 नवंबर को संस्कार एवं विवाह महोत्सव का कार्यक्रम संपन्न होगा। कार्यक्रम की व्यवस्था में मेवाराम राठौर, गोविंद गुप्ता, रवींद्र सिंह मूडागालिब, उमानाथ गुप्ता रामपुर, ठाकुर प्रसाद शाहपुर, बाबूराम असौवा, उत्तम सिंह गुलौली, रामदीन शर्मा मगरेना के अलावा ज्ञानदीप अवस्थी, रामदिनेश वर्मा, मुरारी लाल मिश्रा आदि समेत तमाम साधक कर रहे हैं।