लखीमपुर खीरी। जिले में 131 गोशालाओं में 31,964 पशु संरक्षित हैं और 12,713 सुपुर्दगी में हैं, फिर भी प्रमुख सड़कों पर निराश्रित पशुओं के झुंड घूम रहे हैं। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ हादसों का खतरा बना हुआ है।
पशु फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं और हादसों में खुद भी घायल हो रहे हैं। रात में सड़क पर बैठे पशु वाहन चालकों को दिखाई नहीं देते, जिससे हादसे का खतरा बढ़ जाता है। इन दिनों कांवड़ यात्रा के दौरान भी छुट्टा पशु परेशानी का कारण बने हैं।
शनिवार को पड़ताल में शहर के इमली चौराहा, गढ़ी मिदनिया बाइपास और गांधी विद्यालय के पास पशु बैठे मिले। मझगईं, खमरिया, मितौली, पलिया, निघासन और धौरहरा के मुख्य मार्गों पर भी पशुओं के झुंड नजर आए। बिजुआ के पड़रिया तुला और भीरा क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में पशु सड़कों पर घूमते मिले।
छुट्टा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में संरक्षित कराने की जिम्मेदारी संबंधित नगर पालिका या नगर पंचायत और गांव स्तर पर खंड विकास अधिकारी की है। इसके बावजूद दोनों स्तरों पर लापरवाही बरती जा रही है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन कागजों में खानापूरी कर रहा है। गोशालाओं और पशु संरक्षण के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है।
-
छुट्टा पशुओं की वजह से हुए कुछ हादसे
भीरा के मुड़िया हेमसिंह के विनोद की बाइक पशुओं के झुंड से टकराने पर वह घायल हो गए। एक सप्ताह पहले छुट्टा पशु को बचाने के प्रयास में दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर में फूलबेहड़ के तेतारपुर निवासी नन्हू यादव और प्रदुम यादव घायल हुए। 70वीं वाहिनी के जवानों ने दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया।
अगस्त, 2025 में गोला के अलीगंज रोड पर छुट्टा पशु के हमले में सूर्य प्रकाश नाम के युवक घायल हुए थे, जिनकी तीन दिन बाद मौत हो गई। मार्च 2025 में राजापुर मंडी में दो सांडों की लड़ाई की चपेट में आने से एक बुजुर्ग की मौत हो गई थी। अगस्त 2026 में ईसानगर के हसनुपर कटौली में बाइक सांड से टकराने से दिलावपुर गांव के अनूप घायल हो गए थे।
नगर निकाय और खंड विकास अधिकारियों के सहयोग से पशु लगातार संरक्षित किए जा रहे हैं। पशुओं के लिए गोशालाओं में हरा चारा, पानी और इलाज की उचित व्यवस्था है। शनिवार को खीरी पहुंचकर इसका निरीक्षण भी किया है।
-अजय कुमार कनौजिया, अपर निदेशक, पशुपालन विभाग, लखनऊ मंडल, लखनऊ
इमली चौराहे के पास सड़क पर बैठे छुट्टा पशु। संवाद