पांच दुकानदार ने ली तो नौ ने नोटिस लेने से किया इंकार
दुकानदारों के अनुसार कोर्ट में चल रहा है मामला, पार्क प्रशासन कर रहा इंकार
दुधवा नेशनल पार्क प्रशासन ने गौरीफंटा मंडी में शेष रह गए दुकानदारों को हटाने की मुहिम शुरू करते हुए उन्हें नोटिस जारी किए हैं। इसके बाद पांच दुकानदारों ने तो नोटिस ले लिया, जबकि शेष नौ दुकानदारों ने नोटिस लेने से इंकार कर दिया। जबकि अब नोटिस जारी होने के बाद मिली एक सप्ताह की मोहलत को गुजरने में अब मात्र तीन दिन ही शेष रह गए हैं। इससे दुकानदारों में हड़कंप मचा हुआ है। बता दें कि भारत नेपाल सीमा पर गौरीफंटा रेंज में बसी मंडी में शेष रह गए दुकानदारों को हटाने के लिए नोटिस भेजे गए हैं। पार्क अधिकारियों के मुताबिक इसको लेकर कोई भी मुकदमा विचाराधीन नहीं है। वह शुरूआत से ही यहां बसी मंडी को अवैध अतिक्रमण मानते हैं। बता दें कि करीब वर्ष 2010 में पार्क प्रशासन ने सुप्रीमकोर्ट के निर्णय के तहत यहां बसी मंडी के सैकड़ों दुकानदारों को हटवा दिया था, लेकिन कुछ दुकानदार एक अन्य कोर्ट में चल रहे मामले के चलते बच गए थे। धीरे धीरे यहां दुकानें और बढ़ गईं थीं और फड़ भी लगने लगे थे, जिसको पार्क अधिकारियों ने हटवाया था। इसके बाद दोबारा से प्रशासन ने एक सप्ताह में दुकानों को हटा लेने की नोटिस जारी की थी। जिसको गुजरने में अब मात्र तीन दिन ही शेष रह गए हैं। इधर बाजार के पांच दुकानदारों ने जहां नोटिस ले लिया है वहीं शेष नौ दुकानदारों ने नोटिस लेने से इंकार किया है। दुकानदारों के अनुसार यह मामला कोर्ट में चल रहा है और वन विभाग तुगलकी फरमान जारी कर हौवा खड़ा कर रहा है। बताया कि जब तक मामला कोर्ट में चलता रहेगा तथा फैसला नहीं आ जाएगा तब तक हम लोग कब्जा नहीं छोड़ेंगे। मामले में रेंजर दीपचंद ने बताया कि आरक्षित वनभूमि पर बसी बाजार का अस्तित्व अब खत्म होने की कगार पर है। हाईकोर्ट में केस खारिज होने के बाद भी कुछ लोगों ने फाइलें अलग-अलग दायर कर रखी हैं लेकिन चार अन्य लोग किसी भी कोर्ट में नहीं है और फर्जी तौर पर कब्जा जमाए बैठे हैं।