1468 महिला वोटर में सिर्फ सात ने डाले अपने वोट
गांव में महिलाओं के वोट न डालने की रही है परंपरा
धौरहरा विधानसभा क्षेत्र के गणेशपुर गांव में इस बार भी महिलाओं ने वोट डालने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। 1468 महिला मतदाताओं में से बुधवार को सिर्फ सात ने ही वोट डाले। इनमें से गांव की दो बुजुर्ग महिलाओं के अलावा बाकी पांच सरकारी कर्मचारी हैं। मालूम हो कि गांव की महिलाओं ने आजादी के बाद से 2009 के विधानसभा चुनाव तक एक बार भी मतदान नहीं किया।
वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव और उसके बाद 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में केवल आशा वर्कर, शिक्षामित्र, आंगनबाड़ी वर्कर्स ने ही अपने वोट डाले थे। गांव की अन्य महिलाएं मतदान से दूर रहीं। इस बार गांव में 1468 महिला और 1900 पुरुष मतदाता थे। सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक यहां 1200 पुरुषों ने मतदान किया जबकि महिलाओं के केवल सात वोट पड़े। महिला मतदाताओं में गांव की बुजुर्ग महिला सावित्री और शिवप्यारी के अलावा बाकी पांच महिलाओं में आशा सिंह, किरन सिंह, शीलू मौर्या, सुशीला और कमला शामिल हैं। यह महिलाएं शिक्षा मित्र, आशा वर्कर, आंगन बाड़ी वर्कर, सहायिका और रसोइया हैं।
गौरतलब है कि पंचायत चुनाव में जब गांव में प्रधान पद की सीट महिला के लिए आरक्षित थी तब भी इस पद की उम्मीदवार महिलाओं तक ने अपने वोट नहीं डाले। केवल पुरुषों के वोटों के बल पर चुनाव जीतीं और प्रधानी भी परिवार के पुरुषों के बल पर ही चलाई। अफसरों से लेकर नेताओं तक ने इन महिलाओं को मतदान के लिए समझाने की बहुतेरी कोशिश की लेकिन महिलाएं हैं कि अपनी यह दकियानूसी परंपरा छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।