लखीमपुर खीरी। उम्र बढ़ने के साथ भूलने की आदत को लोग अक्सर सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बार-बार सामान रखने की जगह भूलना, परिचितों को न पहचान पाना या रास्ता भटक जाना अल्जाइमर के लक्षण हो सकते हैं।
60-65 वर्ष की उम्र के बाद इस बीमारी के मामले अधिक सामने आते हैं। विश्व अल्जाइमर दिवस पर लोगों को बीमारी के लक्षणों और समय पर चिकित्सकीय सलाह के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश शुक्ला ने बताया कि मानसिक रोग ओपीडी में रोजाना दो से चार मरीज अल्जाइमर से संबंधित समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। बीमारी की शुरुआत में याददाश्त कमजोर होने लगती है। मरीज रोजमर्रा की चीजें या उन्हें रखने की जगह भूलने लगता है। धीरे-धीरे नजदीकी रिश्तेदारों और परिचितों को पहचानने में भी परेशानी होने लगती है।
लक्षण दिखने पर मरीज को डांटने या उपेक्षित करने के बजाय सहानुभूति, सुरक्षित वातावरण, नियमित दिनचर्या और आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श देना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या में सहायता लेने में संकोच न करें।
गंभीर स्थिति में भूल जाते हैं घर और रास्ता
विशेषज्ञ के अनुसार बीमारी बढ़ने पर मरीज अपने घर और परिचित रास्तों को भी भूल सकता है। कई बार वह परिजनों को भी पहचान नहीं पाता। इसके साथ ही व्यवहार में बदलाव आने लगता है। वह चिड़चिड़ा रहने लगता है और छोटी-छोटी बातों पर प्रतिक्रिया देने लगता है।
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भूलने की समस्या को नजरअंदाज न करें
डॉ. अखिलेश शुक्ला ने बताया कि बढ़ती उम्र के साथ भूलने की समस्या को हमेशा सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति में बार-बार एक ही बात पूछना, हाल की घटनाओं को भूलना, परिचित स्थानों पर रास्ता भूल जाना, दैनिक कार्यों में कठिनाई, व्यवहार में बदलाव अथवा निर्णय लेने की क्षमता में कमी जैसे लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है। समय पर जांच और उचित उपचार से मरीज और उसके परिवार को बेहतर सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।