लखीमपुर खीरी। लखनऊ निवासी डॉ. यश विक्रम ने एचडीएफसी बैंक के चार कर्मचारियों पर सदर कोतवाली में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है। आरोपियों में दो लीगल मैनेजर और दो अन्य कर्मचारी शामिल हैं। मामला 50 लाख रुपये की फर्जी चेक का बताया जा रहा है।
पुलिस को दी तहरीर में लखनऊ निवासी डॉ. यश विक्रम ने बताया कि उनकी फर्म मैसर्स साधना सिंह का खाता एचडीएफसी बैंक शाखा विकासनगर लखनऊ में है। करीब छह सालों से यह खाता सक्रिय नहीं है। 7 जून 2024 को उनके फोन पर एक मैसेज आया। इसमें उनकी फर्म के खाते पर 50 लाख रुपये की चेक लगाए जाने की बात कही गई।
खाता बंद होने के कारण धोखाधड़ी की आशंका हुई तो उन्होंने बैंक से संपर्क साधा। बैंक की ई-मेल पर उन्होंने किसी को कोई चेक न देने और किसने यह चेक लगाई है, इसकी जानकारी मांगी। बैंक ने ई-मेल के माध्यम से ही बताया कि कथित चेक उन्होंने ही अपनी लोन की आंशिक अदायगी के रूप में दिया था।
पीएनबी विंध्याचल मिर्जापुर के जिस खाते का चेक उनके खाते में लगाया गया, वह 2017 में ही एचडीएफसी बैंक ने लोन टेकओवर करके बंद करवा दिया गया था। पूछताछ में पता चला कि सुयश नारायण लीगल मैनेजर एचडीएफसी बैंक और रमेश जायसवाल, लीगल मैनेजर एचडीएफसी बैंक ने चेक डाक के जरिए भेजकर लखीमपुर की थरवरनगंज बैंक शाखा में लगाया है।
उन्होंने दोबारा 25 जुलाई 2024 को एचडीएफसी बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन को ई-मेल भेजकर स्पष्टीकरण मांगते हुए प्रबंधक से चेक को कूटरचित तरीके से लगाने के लिए जांच की मांग की। फिर भी बैंक की ओर से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। इसके बाद पीड़ित ने एचडीएफसी बैंक लिमिटेड के लीगल मैनेजर सुयश नारायण, रमेश जायसवाल, शाखा प्रबंधक विकासनगर (लखनऊ), सुमित त्रिपाठी, बैंक शाखा थरवरनगंज लखीमपुर और विजयेंद्र बहादुर के खिलाफ तहरीर देकर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।