लखीमपुर खीरी। दुधवा में गैंडों की आजादी का मार्ग प्रशस्त हो गया है। सौर ऊर्जा चालित बाड़ में रहने वाले गैंडों में से कुछ को जंगल में स्वतंत्रता पूर्वक विचरण करने की आजादी मिलने वाली है। गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-1 से चार गैंडों को चिह्नित कर उन्हें कॉलर आईडी लगाने के बाद जंगल में छोड़ दिया जाएगा। इस दौरान गैंडा विशेषज्ञ गैंडों की गतिविधियों और खानपान का बारीकी से अध्ययन करेंगे।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-1 से चार गैंडों का चयन करने के बाद उनकी डीएनए प्रोफाइल और पहचान प्रोफाइल बनाने के साथ इन चार गैंडों को आईडी कॉलर लगाने के बाद जंगल में स्वच्छंद विचरण के लिए आजाद कर दिया जाएगा। गैंडे जंगल के किस क्षेत्र में विचरण कर रहे हैं, कॉलर आई के जरिए पता चल सकेगा।
गैंडा विशेषज्ञ, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन लगातार इन गैंडों की गतिविधियों और खानपान और अन्य गतिविधियों पर नजर रखेंगे। जंगल में स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़े जाने वाले चार गैंडों में मादा गैंडे भी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि यह कदम प्रयोग के तौर पर उठाया जा रहा है। प्रयोग कामयाब हुआ तो इसे दुधवा में चरणबद्घ तरीके से लागू किया जाएगा।
दुधवा के गैंडा परिवार में इस समय हैं 42 गैंडे - दुधवा नेशनल पार्क में वर्ष अप्रैल 1984 में आसाम के जंगलों से पांच गैंडे लाकर गैंडा पुनर्वासन योजना शुरू की गई थी। 38 साल से गैंडों का परिवार सौर ऊर्जा चालित बाड़ के बंधन में है।
गैंडों की बढ़ती संख्या को देखते हुए चार साल पहले दुधवा के ही बेलरायां रेंज में गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-2 के तहत 14 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सौर ऊर्जा चालित बाड़ से घेर कर गैंडों का नया घर बनाया गया था। मौजूदा समय में गैंडा पुनर्वासन योजना में कुल 42 गैंडे हैं। इनमें 38 गैंडे फेज-1 में और चार गैंडे फेज-2 में हैं।
दुधवा के सभी गैंडों की बनेगी दोबारा डीएनए प्रोफाइल - दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि वर्ष 2018 में दुधवा के अधिकांश गैंडों की डीएनए प्रोफाइल बनाई जा चुकी है। अब एक बार फिर सभी गैंडों के सैंपल लेकर उनका डीएनए टेस्ट करने के बाद उनकी डीएनए प्रोफाइल बनाई जाएगी।
साथ ही उनकी पहचान भी अंकित की जाएगी। ताकि गैंडों के जीवन और विकास का अच्छे ढंग से अध्ययन किया जा सके। किसी गैंडे की मौत होने पर पता लगाया जा सके कि किस गैंडे की मौत हुई है। गैंडों की गणना का कार्य भी इसी माह होना है। इसी के साथ इनकी डीएनए प्रोफाइल भी दोबारा बनेगी। इस कार्य में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और गैंडा विशेषज्ञ सहयोग करेंगे।