बांकेगंज। दुधवा नेशनल पार्क में चल रही गैंडा पुनर्वासन योजना के तहत सौर ऊर्जा चालित बाड़ में रह रहे चार गैंडों को इसी माह के दूसरे पखवाड़े में आजादी मिल सकती है। इसके लिए 11 मार्च को एक महत्वपूर्ण बैठक दिल्ली में होने जा रही है। इस बैठक में गैंडों को जंगल में स्वच्छंद छोड़ने की तारीख, प्रक्रिया और टीम तय की जाएगी। बैठक में दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ललित कुमार वर्मा भी शामिल हाेंगे।
दुधवा नेशनल पार्क के दक्षिण सोनारीपुर रेंज में चल रही गैंडा पुनर्वासन योजना फेज वन में गैंडों की आजादी को लेकर पिछले तीन साल से कवायद चल रही है। इसमें से केवल चार गैंडे सौर ऊर्जा चालित बाड़ से निकाल कर जंगल में स्वछंद विचरण करने के लिए छोड़े जाएंगे। इसको लेकर लगभग सारी तैयारियां पूरी हो चुकी है। केवल केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार से अनुमति की प्रतीक्षा थी। 11 मार्च को दिल्ली में होने वाली बैठक में यह अनुमति जारी हो सकती है।
अनुमति मिलने के बाद मार्च माह के दूसरे पखवाड़े में चार गैंडों को आजाद किया जा सकता है। बता दें कि गैंडों को उनके पूर्वजों की धरती पर पुनर्वासित करने की अनूठी योजना के तहत वर्ष 1984 में गैंडा पुनर्वासन योजना की शुरुआत दुधवा नेशनल पार्क के दक्षिण सोनारीपुर रेंज में हुई थी। आसाम के जंगल से चार गैंडों को यहां सौर ऊर्जा चालित बाड़ में रखा गया था। इसमें एक साल के अंदर ही दो गैंडों की मौत हो गई। इसके बाद चार मादा गैंडे नेपाल से लाकर यहां रखे गए। इससे इनका कुनबा बढ़ना शुरू हुआ और इनकी संख्या बढ़कर 48 हो गई है। इसके बाद वर्ष 1918 में बेलरायां रेंज में गैंडा पुनर्वासन योजना फेज टू चालू हुई थी। गैंडा पुनर्वासन योजना के ठीक 40 साल बाद अब चार गैंडों को आजादी मिलने वाली है।
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चार गैंडों को सौर ऊर्जा चालित बाड़ से निकालकर जंगल में छोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक दिल्ली में 11 मार्च को होने जा रही है। इसमें महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने हैं। इसके बाद मार्च के दूसरे पखवाड़े में गैंडों को आजाद करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व