पलियाकलां। पलिया-भीरा मार्ग पर स्थित सांई मंदिर के आगे से बोझवा गांव जाने वाला रास्ता अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि 2012 से न तो गांव में सड़क है और न ही नाली का ही निर्माण कराया गया है।
मटैहिया ग्राम पंचायत में आने वाले इस गांव पर किसी ने अभी तक ध्यान नहीं दिया है। इससे ग्रामीण बारिश के मौसम में करीब चार फुट पानी से होकर सड़क तक आने के लिए मजबूर हो जाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इस गांव में करीब 500 की आबादी निवास करती है और इस मार्ग से होकर घरों तक जाने के लिए रास्ता भी बना हुआ है। सन् 2012 में बोझवा गांव के कुछ लोग यहां आकर बसे थे और तब से यहां आबादी और घर दोनों बढ़ गए हैं, लेकिन सड़क व नाली न होने से रास्ते पर जलभराव हो जाता है और घरों का गंदा पानी भी सड़क पर भर जाता है।
ग्रामीण रामनरेश, गंगाराम, मांगूलाल, रामकुमार, जसपाल, मईकू मौर्य, जगदीश कश्यप, रामविलास आदि ग्रामीणों के घर इस तरफ ही पड़ते हैं और इनका कहना है कि न तो मटैहिया ग्राम प्रधान ध्यान दे रहे हैं और न ही भीरा नगर पंचायत की तरफ से ही कुछ किया जा रहा है। जिसके चलते ग्रामीणों में रोष भी फैला हुआ है।
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रंगाई-पुताई न होने से जर्जर हो गया उप स्वास्थ्य केंद्र
मझगईं। ग्राम पंचायत छेदुई पतिया में 2008 में बनी उप स्वास्थ्य केंद्र की हालत बदतर हो गई है। भवन की रंगाई-पुताई न होने से उपकेंद्र खंडहर में तब्दील होता नजर आ रहा है। इस कारण मरीजों का ठीक ढंग से इलाज भी नहीं हो पा रहा है।
छेदुई पतिया में 2008 में बनी उप स्वास्थ्य केंद्र की बिल्डिंग का अभी तक मरम्मत कार्य नहीं हुआ है। उप स्वास्थ्य केंद्र की खिड़कियां टूटी हुई हैं। भवन की रंगाई-पुताई न होने से वह काफी जर्जर हो गया है। अस्पताल परिसर में पानी की टंकी का स्टैंड तो बना है, लेकिन टंकी नहीं है। 76 लाख की लागत से बना भवन अब बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
मझगईं और बम्हनपुर के बीच में स्थित छेदुई पतिया में यह स्वास्थ्य उप केंद्र बना हुआ है। यहां रोजाना कई गांवों के लोग आकर इलाज कराते हैं। अस्पताल परिसर में केवल एक नल लगा है। अस्पताल आने वाले मरीज दूषित पानी पीने को मजबूर है।
ग्रामीण अलीहसन, रफीक, शत्रोहन, सुधीर, रहीश, युसुफ, बलराम, मनोज, अवधेश आदि का कहना है कि जब से यह बिल्डिंग बनी है, तब से आज तक इसका मरम्मत कार्य नहीं हुआ है, अस्पताल में जितनी भी खिड़की है सभी टूटी हुई है। संवाद
पलिया के बोझवा में गांव जाने वाले रास्ते पर भरा पानी। संवाद