बांकेगंज। नेपाल से उत्पाती हाथी आए और 21 दिन दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी की मड़हा, जटपुरा और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के सहजनियां जंगल में प्रवास कर वापस नेपाल चले भी गए, लेकिन अपने पीछे किसानों को बड़ा दर्द दे गए हैं। इन 21 दिनों 21 गांवों के किसानों की करीब 75 एकड़ भूमि पर गन्ना, धान और केला की फसलें उत्पाती हाथियों के पैरों तले रौंदी गईं। लेकिन किसानों के नुकसान की तरफ अब तक मुड़कर नहीं देखा गया है। सरकारी सिस्टम की सुस्ती से इन किसानों की दिवाली अंधेरे में बीत गई और छठ की खुशियां भी काफूर हो गईं। जबकि दिवाली से पहले ही मुआवजा देने की बात कही गई थी। सर्दियों का मौसम आने को है। बच्चों के लिए गर्म कपड़े और बिस्तर के साथ शादी-विवाह का खर्चा सिर पर है, लेकिन किसानों के हाथ खाली हैं। किसानों सशंकित हैं कि उन्हें नुकसान का मुआवजा मिलेगा भी या नहीं।
बांकेगंज कस्बा के किसान गोल्डी गोयल का कहना है कि नेपाली उत्पाती हाथियों ने उनकी दो एकड़ से अधिक गन्ने की फसल रौंद डाली, न फसल मिली न ही मुआवजा। वन विभाग ने दिवाली से पहले फसल नुकसान मुआवजा देने की बात कही थी, जो अभी तक नहीं मिल पाया।
बांकेगंज क्षेत्र की महिला किसान प्रेमवती का कहना है कि उत्पाती हाथियों ने उनके छह बीघा खेत में खड़ी गन्ने की फसल को रौंदकर तहस-नहस कर दिया। 20 दिन बीतने के बाद भी फसल नुकसान का सर्वे तक नहीं हुआ है। इससे किसानों के लिए फसल नुकसान मुआवजा छलावा साबित हो रहा है।
उत्पाती हाथियों ने फसलों के साथ किसानों के अरमान भी रौंदे
बांकेगंज क्षेत्र की महिला किसान जमुना देवी का कहना है कि 21 दिन तक जटपुरा में रुके उत्पाती हाथियों ने फसलों के साथ उनके अरमान भी रौंद डाले। धान और गन्ने की फसल कटाई शुरू हो गई थी। इस बीच हाथियों ने एक एकड़ फसल रौंदने के साथ उनके अरमानों को भी रौंद डाला। मुआवजे के नाम पर उन्हें एक फूटी कौड़ी नहीं मिली।
बांकेगंज क्षेत्र के किसान लालजी प्रसाद का कहना है कि नेपाल से आए उत्पाती हाथी किसानों के लिए आफत बन गए। 21 दिनों में हाथियों ने उनके खेत में कई बार घुसकर दो एकड़ से अधिक धान और गन्ने की फसल रौंद डाली। अब न धान बचा और न ही गन्ना और फसल मुआवजा भी नहीं मिला। घर का खर्च कैसे चले, इससे वह परेशान है।
जिन किसानों की फसलों को हाथियों ने नष्ट किया है, उसके मुआवजे के लिए कृषि, गन्ना और राजस्व विभाग से सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे रिर्पोट मिलने के बाद ही नियमानुसार किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। -डॉ. अनिल कुमार पटेल, डीडी, डीटीआर, बफरजोन।