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यूपी: दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में 45 फीसदी की बढ़ोत्तरी

Tue, 30 Jul 2019 06:30 AM IST
बरेली ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखीमपुर खीरी
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बाघ - फोटो : अमर उजाला
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बाघ संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों के चलते दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में करीब 45 फीसदी इजाफा हुआ है। वर्ष 2014 में यहां 60 बाघ थे, जबकि इस बार गणना में 90 से 100 बाघों के होने का अनुमान लगाया गया है। वहीं पूरे प्रदेश में इन पांच सालों में बाघों की कुल संख्या 90 से बढ़कर 173 पहुंच गई है। इस तरह दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में आशातीत बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।

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विश्व बाघ दिवस पर बाघ गणना के जारी परिणाम खीरी जिले के लिए काफी सुखद हैं। वर्ष 2016 से कैमरा ट्रैपिंग के जरिए बाघों की गणना शुरू हुई थी। इसके तहत 2016 में 250 कैमरे लगाए गए थे। जबकि वर्ष 2018 में 350 कैमरे लगाकर बाघों की तस्वीरों को ट्रैप किया गया। जबकि पीलीभीत टाइगर रिजर्व में वर्ष 2017 में 325 और 2018 में 375 कैमरे लगाए गए थे। इनमें कैद बाघों की तस्वीरों की धारियों का मिलान करके देहरादून के भारतीय वन्यजीव संस्थान में बाघों की संख्या का आंकलन किया गया है।

दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डाइरेक्टर संजय पाठक कहते हैं कि बाघों को अनुकूल वातावरण, प्राकृतिक वास, पर्याप्त भोजन और सुरक्षा मिलने से दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी में बढ़ोत्तरी हुई है। इसके साथ ही हमारी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। अब और अधिक मुस्तैदी से बाघों की सुरक्षा करने के साथ-साथ प्राकृतिक वास की सुरक्षा भी करना हमारी जिम्मेदारी है।
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दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक मनोज सोनकर का कहना है कि दुधवा के जंगल में जिस तेजी से बाघों की संख्या में इजाफा हो रहा है, उससे अफसरों और वन कर्मियों की जिम्मेदारी कई गुना अधिक बढ़ रही है। बाघों की सुरक्षा और खाद्य शृंखला को मजबूत करने में विभागीय कर्मी परिवार से बढ़कर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर बाघों की संख्या में कई गुना अधिक बढ़ोत्तरी कर एक नया कीर्तिमान बनाएंगे।

दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल कहते हैं तराई के जंगल विशेषकर दुधवा और पीलीभीत टाइगर रिजर्व बाघों के प्राकृतिक वास हैं। पिछले वर्षों में शिकार आदि पर प्रभावी अंकुश लगने,ग्रास लैंड,वेटलैंड के उचित प्रबंधन से बाघों की बढ़ोत्तरी तेजी से हुई है। इसके लिए सभी बधाई के पात्र हैं।

दुधवा टाइगर रिजर्व के पूर्व फील्ड डाइरेक्टर रमेश कुमार पांडेय का कहना है कि जंगलों में विशेषकर टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा हमेशा से सबसे बड़ी चुनौती रही है। बाघों का संरक्षण इसलिए आवश्यक है क्योंकि बाघ के संरक्षण के साथ ही जंगल, जल, वायु और वनस्पतियों का भी संरक्षण होता है।

नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा वन एवं वन्यजीवों की निगरानी के लिए एम स्ट्राइप्स स्मार्ट पेट्रोलिंग का वन्यजीव संरक्षण को बदलने में महत्वपूर्ण कदम बताया। कहा कि एम स्ट्राइप्स पेट्रोलिंग का डेटा यह बता देता है कि किस वन कर्मी ने कितनी गश्त की है, जिससे मेहनती वन कर्मियों का उत्साहवर्धन करना संभव हो पाता है। इसके साथ ही जंगल और वहां रहने वाले वन्यजीवों की सुरक्षा मजबूत होती है।

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