लखीमपुर खीरी के नॉर्थ खीरी वन प्रभाग में तैनात कनिष्ठ लिपिक विक्रांत नेगी को मंगलवार को लखनऊ से आई एंटी करप्शन टीम ने 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। दुधवा नेशनल पार्क की स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स में तैनात सिपाही इंदल सिंह ने अपनी पत्नी की तबीयत खराब होने का हवाला देकर स्थानांतरण करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया था। तबादला कराने के लिए यह रकम मांगे जाने का आरोप है।
उत्तराखंड के हल्द्वानी के मोहल्ला थालडाट निवासी विक्रांत नेगी लखीमपुर फॉरेस्ट कॉलोनी में रहता है। वह नार्थ खीरी डीएफओ के ऑफिस में तैनात है। सिपाही इंदल सिंह के मुताबिक उन्होंने दुधवा पार्क से महेशपुर पोस्ट स्थानांतरण के लिए प्रार्थनापत्र दिया था। इसके बाद विक्रांत नेगी ने उनसे संपर्क कर स्थानांतरण कराने के लिए 12 हजार रुपये घूस मांगी। रुपये न होने की बात कही तो विक्रांत ने उसकी फाइल रोक दी।
कोतवाली में आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
परेशान होकर इंदल ने लखनऊ के एंटी करप्शन कार्यालय से संपर्क किया। टीम ने जाल बिछाने के बाद विक्रांत को मंगलवार को विलोबी हॉल के गेट पर बुलवाया। वहां रिश्वत लेते ही विक्रांत को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया। टीम विक्रांत को लेकर सदर कोतवाली पहुंची और रिपोर्ट दर्ज कराई।
एक साल में दो बार निलंबित किया जा चुका है आरोपी
कनिष्ठ लिपिक विक्रांत सिंह नेगी का विवादों से पुराना नाता रहा है। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच राजामोहन ने बताया कि इससे पहले कार्य में लापरवाही बरतने और अनुशासनहीनता के आरोप में संबंधित वनकर्मी को एक साल में दो बार निलंबित किया जा चुका है।