लखीमपुर खीरी के मझगई रेंज के गांवों में आतंक का पर्याय बनी बाघिन आखिकार वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गई। बाघिन के पकड़ने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। दस दिन पहले रामनगर गांव के किसान रामदीन को मौत के घाट उतारने के बाद बाघिन ने खालेपुरवा निवासी कोकिला देवी को मार डाला था। तीन दिनों के अंदर दो मौतों से ग्रामीण आक्रोशित हो गए थे। इसके बाद शव को नहीं उठाने दिया था।
ग्रामीण मुआवजे के साथ हमला करने वाली बाघिन को पकड़ने की मांग कर रहे थे। इसके बाद वन विभाग ने बाघिन को पकड़ने के लिए अभियान शुरू किया। बाघिन को पकड़ने के लिए वन क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह ने घटनास्थल के पास तीन बड़े पिंजरों के साथ नौ कैमरे लगवाए थे। ड्रोन से बराबर निगरानी की जा रही थी। इस बीच बाघिन की तस्वीर कैमरों में कैद नहीं हो सकी थी।
विभाग की टीम कर रही थी तलाश
मगर वनकर्मियों को बाघिन के पगचिह्न शारदा नदी किनारे, पैटून पुल के पास व सोमवार को फिर शारदा नदी और भगहर तालाब किनारे मिलने से वन क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह, पशु चिकित्सक दया शंकर, वन रक्षक सतीश चंद्र मिश्रा, डिप्टी रेंजर मनोज कुमार यादव, राजेंद्र, संदीप, राकेश व डालचंद, बब्बू आदि वनकर्मियों ने ड्रोन कैमरों से बाघिन की तलाश शुरू की।
ट्रेंकुलाइजर कर पकड़ी गई बाघिन
मंगलवार तड़के करीब चार बजे रामपुर गांव के बाहर ट्रेंकुलाइजर कर बाघिन को पकड़ कर मझगई रेंज कार्यालय लाया गया, जहां उसको नहलाने के साथ भूख मिटाने के लिए दो बकरियां रखी गईं। बाघिन के पकड़े जाने की खबर फैलते ही नदी किनारे के गांव रामनगर, रामपुर, दुबहा, चौरी, नया पुरवा, खालेपुरवा आदि गांव के लोगों ने राहत की सांस है।