जिले में 190 ईंट भट्ठे हैं, जो ईंट निर्माता समिति के आह्वान पर जुलाई से बंद हैं। कारण यह है कि ईंट-भट्ठों को खनन से पूर्व पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से स्वच्छता के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल करने के दायरे में लाए जाने का संगठन विरोध कर रहा है। इस बीच कुछ भट्ठा स्वामियों ने चोरी-छिपे मिट्टी का खनन कर ईंट पथाई शुरू कर दी है। इसकी जानकारी होने से प्रशासन भी इंकार कर रहा है। वहीं खान निरीक्षक राजेश कुमार ने मामले की जांच करने की बात कही है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी कर ईंट भट्ठों को खनन से पूर्व पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से स्वच्छता संबंधी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया है। इस आदेश के खिलाफ भट्ठा स्वामियों के संगठन ईंट निर्माता समिति ने विरोध करते हुए शासन को ज्ञापन सौंपे थे। इसके बाद जुलाई से सभी भट्ठा स्वामियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जो अभी तक जारी है।
इस दौरान कुछ भट्ठा स्वामियों ने कुछ लोगों से साठगांठ कर मिट्टी का खनन करते हुए ईंट पथाई शुरू कर दी है। मितौली क्षेत्र में फत्तेपुर और रतहरी स्थित ब्रिक फील्ड, मैलानी के सुआबोझ और ओयल स्थित एक भट्ठे पर ईंटों की पथाई शुरू कर दी गई है। सूत्रों की माने तो इस संबंध में आवश्यक पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से एनओसी भी नहीं प्राप्त की गई है। ईंट निर्माता समिति के एक पदाधिकारी ने बताया है कि प्रशासन की मिलीभगत से कुछ भट्ठों पर ईंट पथाई शुरू हो गई है, जिससे सरकार के राजस्व को क्षति हो रही हैै। वहीं एसोसिएशन भी इससे नाराज है।
खान निरीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि सभी ईंट भट्ठा स्वामियों ने स्वयं हड़ताल कर रखी है, जिससे ईंट पथाई का कार्य बंद है। अभी तक किसी भट्ठा स्वामी ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से एनओसी प्राप्त नहीं की है और न ही इस संबंध में मुुझे जानकारी दी गई है। मिट्टी खनन के लिए भी किसी को अनुमति नहीं दी गई है। जिन भट्ठों पर ईंट पथाई की सूचना मिल रही है, उनकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।