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घाघरा नदी ने मिटाया बाछेपारा गांव का वजूद

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बाछेपारा में कटान करती घाघरा नदी। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। रमियाबेहड़ ब्लॉक में घाघरा नदी ने तबाही मचाते हुए बाछेपारा गांव का वजूद मिटा दिया है। अब नदी ने बिंजहा गांव की तरफ रुख किया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर बचाव कार्य तेज नहीं किए गए तो बिंजहा गांव को भी नहीं बचाया जा सकेगा।
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तहसील मुख्यालय से दस किलोमीटर दूर रमियाबेहड़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत भटपुरवा बिंजहा के गांव बाछेपारा में करीब 150 परिवार रहते थे। पिछले साल नदी ने कटान कर कुछ घरों को काट दिया था। तब सिंचाई विभाग ने 5.18 करोड़ की परियोजना का शिलान्यास कर गांव को बचाने का काम शुरू किया। इससे कटान कुछ हद तक धीमा हुआ और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। इस साल एक बार फिर घाघरा ने ऐसी विनाशलीला रची कि बाछेपारा गांव का वजूद ही मिट गया। ग्रामीण अपने खून पसीने की कमाई से बनाए घरों को अपने हाथों से तोड़कर सरकारी स्कूलों और सड़कों के किनारे आशियाना बनाकर जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
तहसील प्रशासन की ओर से सिर्फ तिरपाल और पिपिया देकर उनके जख्मों पर मरहम लगाया गया है।
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बिंजहा गांव से सिर्फ 50 मीटर दूर नदी कर रही कटान
150 परिवार वाले बाछेपारा गांव में करीब 2000 की आबादी थी गांव के लोग हंसी खुशी अपना जीवन गुजार रहे थे। हंसते खेलते गांव को जैसे किसी की नजर लग गई और देखते ही देखते घाघरा नदी की विनाशकारी लहरों में पूरा गांव समा गया। घाघरा नदी की तबाही यहीं नही रुकी अब घाघरा नदी ने बिंजहा गांव की तरफ रुख कर लिया और वह गांव से सिर्फ 50 मीटर की दूरी पर बह रही है, और धीरे धीरे कटान कर गांव के करीब आ रही है। जिससे गांव वालों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर बचाव कार्य तेज नही किए गए तो बिंजहा गांव भी नदी में समा जाएगा।
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गांवों को कटान से बचाने के लिए बचाव कार्य चल रहा है। नदी में पानी बढ़ा है इससे नदी का कटान इस समय रुका हुआ है। पानी अधिक होने से बचाव कार्य में दिक्कत आ रही है। फिलहाल बिंजहा गांव पर कोई खतरा नही है।
-बीडी गौतम, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड शारदानगर
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खतरे के निशान से फिर
ऊपर पहुंची शारदा नदी
पलियाकलां। बीते कई दिनों से शांत रूप अख्तियार करने के बाद बनबसा बैराज से रिलीज किए गए पानी से शारदा नदी का एक बार फिर जलस्तर बढ़ गया है और नदी खतरे के निशान से 59 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई है।
शुक्रवार की शाम सात बजे बनबसा बैराज से एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी रिलीज होने के बाद नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। शनिवार को हालांकि बनबसा से रिलीजिंग कम रही लेकिन फिर भी दोपहर 12 बजे तक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 59 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचकर 154.690 पर पहुंच गया, जिससे श्रीनगर समेत कई निचले इलाकों के ग्रामीण चिंतित हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे स्थित मंदिर की सीढ़ियां भी पूरी तरह से नदी के पानी से डूब गईं हैं। जबकि वहां बना स्नानघर भी पानी में आधा डूब गया है। संवाद
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मोहाना नदी के कटान से डरे ग्रामीण ले रहे पूजा पाठ का सहारा
तिकुनिया। भारत नेपाल सीमा पर बह रही मोहाना नदी रननगर और इंदरनगर में तेजी से कटान कर रही है। नदी कटान करते हुए पुरबिया बस्ती गांव में घुस गई है। अब तक गांव के तीन घर कट चुके हैं जबकि पूरा गांव कटान की जद में है। डरे हुए ग्रामीण पूजा अर्चना कर सलामती की मन्नत मांग रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कटान रोकने के लिए दो महीने पहले सिंचाई विभाग के लगाए गए परकूपाइन नदी में समा चुके हैं। इसके चलते ग्रामीणों में दहशत और बढ़ गई है। कटान रोकने का कोई बंदोबस्त न होते देख ग्राम पंचायत रननगर के मजरा गांव पुरबिया बस्ती में कटान से भयभीत ग्रामीणों ने नदी किनारे दो घंटे तक पूजा अर्चना की।
गांव निवासी खेतन प्रसाद राकेश प्रसाद ने बताया सिंचाई विभाग ने कटान रोकने के लिए बांस बल्ली लगाकर बोरिया डालीं थीं जो नदी की तेज धार में समा गई हैं। संवाद
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