हर साल बाढ़ की त्रासदी झेलना खीरी जिले की नियति और बाढ़ से बचाव, राहत की तैयारी एक परंपरा सी बन गई है। हर साल बाढ़ से बचाव और राहत पर जितना पैसा खर्च हो रहा है यदि उसका आधा पैसा भी बाढ़ रोकने के लिए लगाया जाता तो जिले को बाढ़ की त्रासदी से ही निजात मिल जाती। बाढ़ रोकने के प्रयास बरसात शुरू होने के ठीक पहले शुरू होते हैं और बाढ़ गुजरने के बाद वे कोशिशें भी बाढ़ के पानी में बह जाती है।
खीरी जिले की चार तहसीलें पलिया, निघासन, धौरहरा और लखीमपुर बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। जिले में शारदा, घाघरा, मोहाना, कर्णाली और सुहेली नदियों के उफनाने से यहां बाढ़ आती है। इस साल बाढ़ से जिले में करीब 216 गांवों के प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि संभावित बाढ़ से निपटने को जिला प्रशासन ने तैयारी पूरी कर ली हैं। जिला मुख्यालय के साथ-साथ बाढ़ से प्रभावित होने वाली तहसीलों में कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए गए हैं। डीएम, एडीएम और एसडीएम लगातार स्थिति पर निगरानी रख रहे हैं।
एडीएम, खीरी एसपी सिंह ने बताया कि बाढ़ जैसी आपदा से निपटने के लिए जिला
प्रशासन ने अपनी तैयारी पूरी कर ली हैं। राहत और बचाव के इंतजाम कर लिए गए
है। चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। पूरा प्रशासन मुस्तैद है।
पिछले साल हुई थी भारी तबाही
कुल बाढ़ प्रभावित गांव 160
कुल प्रभावित जनसंख्या 1,19,290
बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रफल 0.21229 लाख हेक्टेयर
बाढ़ से ध्वस्त मकान 1114
जनहानि 17
पशु हानि 04
यह है तैयारी
प्रभावित होने वाले संभावित गांव 216
स्थापित बाढ़ राहत केंद्र 20
स्थापित बाढ़ राहत चौकियां 40
नावों की व्यवस्था 426
मोटर बोट 04
रबर बोट 03
सर्च लाइट 132
लाइफ जैकेट 230
कर्मचारियों को प्रशिक्षण
बाढ़ राहत और बचाव के लिए लगाए गए राजस्व कर्मियों, पुलिस कर्मियों, होमगार्ड को इस बार बाकायदा बाढ़ से बचाव और राहत का प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही उन्हें हर समय अलर्ट रहने को कहा गया है।
बाढ़ राहत में गड़बड़ी जांच अधूरी
बाढ़ राहत और बचाव के नाम पर बड़ा खेल होता है। राहत सामग्री की खरीद से लेकर वितरण तक में करोड़ों के वारे-न्यारे हो जाते हैं। पिछले साल बाढ़ से फसलों के नुकसान का मुआवजा निघासन तहसील में लेखपाल और दलाल डकार गए। मामले की जांच तीन महीने से हो रही है जो अभी तक पूरी नहीं हो पाई है।
बाढ़ राहत की तैयारी सिर्फ कागजों पर
निघासन- बैलहा मार्ग पर एक सप्ताह से नाव चल रही हैं। प्रशासन ने अभी तक वहां पर किसी भी नाव की व्यवस्था नहीं की है। जिला प्रशासन भले ही बाढ़ राहत की बड़ी तैयारी का दावा करे लेकिन सच्चाई यह है कि तैयारी मात्र औपचारिकता है। बाढ़ में मिलने वाली इमदाद सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाती है।
अनीता यादव, ग्राम प्रधान बैलहा