लखीमपुर खीरी। आजकल मोहम्मदी-महेशपुर रेंज के कई गांवों में बाघ की दहाड़ सुनी जा रही है। हमले में कई लोग घायल हो चुके हैं। बाघों के आबादी में आने और हमलावर होने की बड़ी वजह बाढ़ बताई जा रही है। जिले में करीब दो महीने से शारदा, घाघरा, मोहाना, सुहेली नदियां उफान पर हैं। गांव कट रहे और पानी जंगल में भरा है।
जुलाई के पहले सप्ताह में हुई बारिश और बैराज से छोड़े गए पानी से जिले में बाढ़ आई थी। 200 से अधिक गांवों और दुधवा के जंगल में पानी भर गया था। शारदा और घाघरा के अलावा छोटी नदियां भी उफना गईं। नदियों का पानी लंबे समय तक जंगल में भरा रहा। पानी भरने के बाद सूखी जमीन की तलाश में वन्यजीव आबादी में पहुंच गए और कई हमले किए।
मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं, उनके रोकथाम और विभागीय कार्यों की समीक्षा के लिए पहुंचे वन मंत्री डाॅ. अरुण कुमार ने भी जंगल में बाढ़ का पानी होने की पुष्टि की। सवालों के जवाब में बताया कि वन्यजीव सूखी जमीन की तलाश में बाहर आ रहे हैं। वन विभाग के अधिकारी भी बाढ़ को ही प्रमुख वजह बता रहे हैं। उधर, बाघों की आबादी भी बढ़ी है। इस वजह से अन्य जानवर भी आबादी में आ गए हैं। संवाद
घटनाएं सामान्य, निर्धारित दायरे में पहुंचने पर हमला करते हैं बाघ
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के दाबीर हसन का कहना कि जिले में वन्य जीवों के हमले की घटनाएं सामान्य घटनाएं हैं। कोई भी असामान्य घटना नहीं है। बाघ को जंगल से निकलकर गन्ने के खेतों में अच्छा प्रवास मिल जा रहा है। कारण, जंगल से सटे ही गन्ने के खेत हैं। गन्ने की फसल भी काफी क्षेत्रफल में है। अगर किसी गन्ने के खेत में बाघ है और कोई उसके प्रवास के 50 से 60 मीटर के निर्धारित दायरे में पहुंच जाता है तब बाघ उस पर हमला कर देता है। इमलिया गांव की घटना में भी युवक अकेले गन्ने के खेत में बाघ के समीप पहुंच गया था। कुछ समय पहले बांकेगंज इलाके में बच्ची को मारने की घटना भी कुछ इसी तरह की है।
मोहम्मदी-महेशपुर रेंज के इन गांवों में दहशत
जिले के मोहम्मदी-महेशपुर रेंज के कई गांवों में बाघ की चहलकदमी से दहशत है। इमलिया, घरथनिया, मूड़ा सरावन, अजान, बेलहरी, कपरहा आदि गांवों के ग्रामीणों की नींद उड़ी है। गांव मूडा सरावन के ग्रामीणों को रात के समय बाघ की दहाड़ भी सुनाई देती है। ग्रामीणों का खेतों में आना-जाना बंद है। डीएफओ संजय बिस्वाल ने बताया कि बाघ की मूमेंट होती रहती है। मोहम्मदी-महेशपुर रेंज में करीब 40 से 45 गांव प्रभावित हैं।
पिंजरे में बकरी मिमियाती रही, लेकिन बाघ ने देखा तक नहीं
बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने इमलिया गांव के बाहर गन्ने के खेतों के समीप चार पिंजरे लगाए हैं। बकरी और पाड़ा बांध गया है। बाघ, पिंजरे के पास से निकल गया और शिकार की ओर देखा तक नहीं। कहा जा रहा है कि तेंदुआ और अन्य वन्य जीव शिकार को देख हमलावर हो जाते हैं, लेकिन बाघ का जब मन होता है तभी शिकार करता है। डीएफओ संजय बिस्वाल ने बताया कि बाघ मंगलवार की रात पिंजरे के पास से निकला। बकरी मिमियाती रही, लेकिन बाघ ने उसकी ओर देखा तक नहीं। ऐसा कैमरे में रिकॉर्ड हुआ था।
जंगल से सात किमी दूर आ गया है बाघ
मोहम्मदी रेंज के गांवों में दहशत का पर्याय बना बाघ मोहम्मदी जंगल से करीब सात किलोमीटर दूर आ गया है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि बाघ का रूट पता चल गया है। जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है।