लखीमपुर खीरी। हैदराबाद थाना क्षेत्र के गांव इमलिया निवासी अमरेश कुमार के परिजनों को मुआवजे की धनराशि नहीं मिली और अफसरों ने वन मंत्री को गुमराह कर दिया। मंगलवार को वन मंत्री ने पीड़ित को मुआवजा मिलने की बात कही थी, जबकि बुधवार दोपहर तक धनराशि नहीं मिली।गांव इमलिया निवासी अमरेश कुमार को बाघ ने करीब आठ दिन पूर्व मंगलवार को हमला कर मार डाला था। गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने घटना के अगले दिन शव सड़क पर रखकर कई घंटे तक हंगामा किया था।
मंगलवार को जिले में पहुंचे वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार से जब पीड़ित को मुआवजा ने मिलने के बारे में सवाल किया गया तो उनका जवाब था कि मुआवजे की धनराशि भेज दी गई है। यह जानकारी उन्हें अफसरों ने दी थी। जब उन्हें पीड़ित को मुआवजा न मिलने और अफसरों की ओर से गलत सूचना देने की बात बताई तो अफसर हरकत में आए।
बैंक की पासबुक देख लीजिए, नहीं आया पैसा
बुधवार को मृतक के पुत्र और पत्नी ने बताया कि दोपहर तक पैसा खाते में नहीं आया था। बताया कि सुबह भी वह बैंक गए थे। परिजनों ने बैंक से मिली पासबुक भी दिखाई, जिस पर धनराशि न आने का जिक्र था। बताया जा रहा है कि पीड़ितों ने गोला विधायक अमन गिरि से भी मुलाकात की और मुआवजा दिलाने की मांग की।
किसी कारणवश धनराशि नहीं पहुंच सकी। आज अपराह्न 1:30 बजे धनराशि पीड़ित के खाते में चली गई है। - विनोद गुप्ता, एसडीएम गोला
पूरा मामला संज्ञान में था। आज पीड़ित परिवार को मुआवजा की धनराशि मिल गई है। - अमन गिरि, विधायक गोला
बाघ के हमले में घायलों को दी आर्थिक मदद
बांकेगंज। वन विभाग ने बुधवार को मोहम्मदी वन रेंज में बाघ के हमले में घायल युवक को आर्थिक मदद प्रदान की। दक्षिण खीरी वन प्रभाग के डीएफओ संजय बिस्वाल ने बताया कि तीन माह पहले बाघ ने रेहरिया निवासी पवन सिंह पर हमला उन्हें घायल कर दिया था। वन विभाग के फाॅरेस्टर मोहम्मद उमर ने पीड़ित को दस हजार रुपये का चेक प्रदान किया है।
ममरी। रेंजर नरेशपाल सिंह ने बताया कि 11 अगस्त को वन रेंज क्षेत्र के ग्राम बंजरिया निवासी किसान हरपाल यादव (55) पर गन्ने के खेत में छिपे बाघ ने हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। उनका इलाज शाहजहांपुर के एक अस्पताल में चल रहा था। रेंजर ने अस्पताल में पहुंचकर पीड़ित परिजनों को दस हजार की सहायता राशि प्रदान की। संवाद
बाघ पीड़ित किसान को चेक देते रेंजर नरेश पाल सिंह। संवाद
बाघ पीड़ित किसान को चेक देते रेंजर नरेश पाल सिंह। संवाद