तिकुनियां। पहाड़ों पर हुई बारिश से मोहाना नदी में बाढ़ आ गई है। इससे पूरा इलाका जलमग्न हो गया है। बाढ़ पीड़ितों ने अपने पशुओं को बाहर कर दिया है। एक महीने में एक दूसरी बार बाढ़ आने से किसानों का भयंकर नुकसान हुआ है।
पहाड़ों पर हुई तेज मूसलाधार बारिश के चलते मोहाना नदी में नेपाल की तीन नदियां, करनाली, पथरहिया और कंदरा का पानी आने से मोहाना नदी उफना गई है। इससे नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ आ गई है। बाढ़ का पानी रननगर गंगानगर की सड़कों पर चलने लगा है। अनूपनगर, कश्यपनगर, नया पिंड क्षेत्र जलमग्न हैं।
नया पिंड गांव के पांच घर रजो बाई, रुकमी बाई, गुरमीत सिंह, चरण सिंह और मलकीत सिंह ने बताया कि उनका घर नदी में समा चुका है। छठा सुरजीत सिंह का घर कट रहा है। यहां के बाढ़ पीड़ितों के भोजन की व्यवस्था तहसील प्रशासन करा रहा है। एसडीम राजीव निगम ने बताया कि तहसीलदार हरे राम को मौके पर भेजा जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों के भोजन की व्यवस्था कराई जा रही है। लोगों को आने-जाने के लिए पर्याप्त नाव उपलब्ध हैं।
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मकान तोड़ दिया, लेकिन मलवा ले जाने वाला रास्ता कटा
कटान पीड़ित ने वीडियो जारी कर मांगी मदद
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजुआ। बिजुआ क्षेत्र के ग्राम बेलहा सिकटिहा में नदी का कहर कम नहीं हो रहा है। लोगाें ने अपने मकान तो तोड़ दिए हैं, लेकिन मलबा दूसरी जगह कैसे ले जाएं। बाहर जाने का रास्ता भी शारदा नदी ने काट दिया है। कटान पीड़ितों ने वीडियो जारी कर मदद मांगी है।
नदी ने सोहन, शारदा, दिलीप और तोताराम के घरों के शौचालय कट गए हैं। घरों को छूती हुई नदी बह रही है। घर किसी भी समय नदी में समा सकते हैं। ग्राम पंचायत करसौर के मजरा नयापुरवा व चकपुरवा इस वर्ष की बाढ़ में समाप्त हो चुके हैं। अब क्षेत्र के बेलहा सिकटिहा गांव, करसौर और करसौर के मजरा बेचेपुरवा पर संकट के बादल छाए हुए हैं।
करीब एक माह पूर्व शारदा नदी ने बेलहा सिकटिहा गांव में कटान शुरू किया था। जब बाढ़ खंड की टीम ने कटान रोकने के लिए बांस के बंबूक्रेट बनाए और बोरियाें में ईंटों के रोड़े डालकर रखे थे, लेकिन तभी ग्रामीणों और टीम में विवाद हो गया था। इससे काम रोकना पड़ा था।
इसके बाद उप जिला अधिकारी गोला विनोद कुमार गुप्ता के काफी समझाने के बाद ग्रामीण मान थे, लेकिन कटान रुकने के कारण कोई भी काम नहीं हो पाया। बोरियों में ईंट का रोड़ा भरा हुआ पड़ा है। शारदा में बाढ़ ज्यादा आ जाने से टीम बिना काम शुरू किए ही वापस चली गई थी। अब नदी ने फिर कटान शुरू कर दिया है। गांव के शंभू एवं अनिल के मकान कटकर शारदा नदी में समा गया है।
सोहन पुत्र रघुबर ने अपने मकान को जेसीबी से तोड़ डाला। मलबा पड़ा है, लेकिन रास्ता नदी में कट जाने के कारण उनके घर तक पहुंचाना मुश्किल है। जिससे वह अपना मलबा उठाकर कहीं दूसरी जगह नहीं ले जा पा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि टीम जब कटान रोकने के लिए आई, तो बांस के जाल बनाकर छोड़ गई थी, लेकिन कोई कार्य नहीं किया था।
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पानी बढ़ने के बाद पलिया-भीरा मार्ग पर प्रशासन ने शुरू की निगरानी
तेज धार के साथ सड़क पर बह रहा पानी, जान जोखिम में डालकर निकलते दिखे लोग
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संवाद न्यूज एजेंसी
पलियाकलां। बनबसा बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने से पलिया-भीरा मार्ग पर बहाव काफी तेज हो गया है। सुबह नौ बजे एक लाख 33 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे सड़क पर पानी बढ़ गया है। सीओ और कोतवाल ने मार्ग पर निगरानी शुरू कर दी है। वाहन चालक जान जोखिम में डालकर तेज बहाव के बीच से वाहनों को निकालते नजर आए।
पलिया-भीरा के मध्य अतरिया के आगे रेल लाइन कटने के बाद से नदी का जलस्तर थोड़ा भी बढ़ता है तो पानी पलिया-भीरा मार्ग पर बहने लगता है। बीते दो दिनों से बनबसा बैराज से लगातार पानी पास किया जा रहा है। सुबह 11 बजे के बाद पानी पास नहीं किया गया। पुलिया के आगे सड़क पर करीब एक से डेढ़ किलोमीटर सड़क पर पानी क्रॉस कर बह रहा है।
दोपहर बाद सीओ यादवेंद्र यादव और कोतवाल मनबोध तिवारी ने दलबल के साथ मौके पर पहुंच कर मार्ग की निगरानी शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक पानी और बढ़ने के बाद इस रूट पर यातायात बंद कर दिया जाएगा।
इस सड़क से यात्रा न करने की अपील
पुलिस और प्रशासन ने पलिया शहर में लाउडस्पीकर के जरिये उद्घोषणा करवाकर पलिया-भीरा मार्ग पर पानी अधिक होने के कारण इस मार्ग का प्रयोग न करने को अपील को। पलिया-निघासन मार्ग से यात्रा करने की बात कही गई। पूरे दिन शहर के मुख्य मार्गों पर प्रचार वाहन घूमता दिखाई दिया।
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पलिया-भीरा मार्ग पर पानी अधिक है, ऐसे में लोगों को पलिया-निघासन मार्ग से निकलने के लिए कहा जा रहा है। जिस जगह पानी धार से बह रहा है, वहां पुलिसकर्मी लगे हुए हैं। पानी और अधिक बढ़ने पर यातायात बंद कर दिया जाएगा।
कार्तिकेय सिंह, एसडीएम पलिया
बेलहासिकटिहा में कटान करती शारदानदी फोटो। संवाद