फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फर्जी खाते खुलवाकर बाढ़ राहत का पैसा हड़पा

Tue, 17 Mar 2015 10:36 PM IST
निघासन
विज्ञापन
विज्ञापन
बाढ़ और कटान से तबाह किसानों की मुआवजे की राशि भी घपलेबाजों ने हड़प ली। इसकी जानकारी बाढ़ पीड़ितों को तब हुई जब बैंक से खाता खुलवाने का धन्यवाद पत्र उन्हें मिला। जागरूक किसान बैंक गए तो वहां अपनी फर्जी आईडी और दूसरे का फोटो लगा देखकर वे दंग रह गए। मामला एडीएम तक पहुंचा तो उन्होंने एसडीएम निघासन को जांच सौंपी।
विज्ञापन

वर्ष 2013 में निघासन तहसील में आई भीषण बाढ़ से फसलों के नुकसान का मुआवजा देने के लिए शासन से आठ करोड़ एक लाख 21 हजार 674 रुपये की धनराशि तहसील प्रशासन को वर्ष 2014 दी गई। सैकड़ों किसानों के नाम से राहत राशि के चेक बांट दिए गए लेकिन बहुत से चेक किसानों को न देकर फर्जी आईडी से खुले खातों में जमाकर पैसा निकाल लिया गया। गांव मोहनलालपुरवा निवासी जगदीश, सतीश, प्रताप बहादुर, इकबाल बहादुर के खेत लालपुर ग्राम पंचायत में हैं। ये सभी लोग लखनऊ, कानपुर या लखीमपुर में रहते हैं। वर्ष 2013-14 में बाढ़ से उनकी फसल पूरी तरह चौपट हो गई थी। लेखपाल और राजस्व निरीक्षक ने नुकसान का सर्वे कर रिपोर्ट तहसील प्रशासन को सौंपी। इसके बाद इन सभी लोगों के राहत राशि चेक बनाई गई। इन लाभार्थियों को हल्का लेखपाल और तत्कालीन तहसीलदार ने बजट न होने की बात कहकर चेक नहीं दीं।
एडीएम हरिकेश चौरसिया ने बताया कि बैंक में फर्जी खाता खुलवाकर किसानों को दिए गए बाढ़ राहत के पैसे को हड़पने की शिकायत मिली है। मामला संगीन है। एसडीएम निघासन को जांच के निर्देश दिए गए हैं। आरोपी लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन

उध्ार शाखा प्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक निघासन रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि बैंक में पहचानपत्र से फोटो का मिलान कर खाता खोला जाता है। पहचानपत्र असली या फर्जी इसकी जांच करने का बैंक के पास कोई साधन नहीं है। यह खाते भी कुछ इसी तरह खुले हैं। फर्जी आईडी पर खाता खुलने की जानकारी होने पर यह खाते ब्लाक कर दिए गए हैं।
ऐसे हुआ खुलासा
जिन किसानों के नाम से फर्जी खाते भारतीय स्टेट बैंक निघासन शाखा में खोले गए थे। भारतीय स्टेट बैंक ने उन किसानों को खाता खोलने के लिए धन्यवाद पत्र भेजा तब वे लोग चौंक गए कि उनके खाता खुलवाए बगैर बैंक में खाता कैसे खुल गया। इन लोगों ने जब बैंक में जाकर पता किया तो अपने नाम की फर्जी आईडी पर दूसरे की फोटो लगी देखकर दंग रह गए।
इनके फर्जी एकाउंट बना निकाली गई रकम...
निघासन निवासी प्रताप बहादुर की दो साल पहले मौत हो चुकी है। उनके नाम से 31 दिसंबर 2014 को खुले खाता नंबर 34551862419 में बाढ़ राहत की 3996 रुपये की चेक संख्या 466891 जमाकर पैसे निकाले गए। इकबाल बहादुर के नाम से 9000 रुपये का चेक संख्या-464876 खाता नंबर-34260492479 में जमाकर रुपए निकाले गए। जगदीश के नाम से खाता नंबर 34284788684 में चेक संख्या-464719 जमाकर 4728 रुपए निकले।
सतीश के खाता नंबर-34284785451 में चेक संख्या-4464718 लगाकर 4728 रुपये का भुगतान किया गया।
फर्जी निवास प्रमाण पत्र पर लगी है प्रधान की मुहर
इस फर्जीवाड़े में निघासन के ग्राम प्रधान भुवनेश्वर प्रसाद शाक्य और लालपुर के ग्राम प्रधान चेतराम यादव की मुहर सतीश, जगदीश, इकबाल बहादुर और प्रताप बहादुर के निवास प्रमाणपत्रों पर लगी है और उनके हस्ताक्षर भी हैं। हालांकि इन प्रधानों ने किसी भी फर्जी दस्तावेज पर मुहर लगाने और हस्ताक्षर करने से इनकार किया है।
खाता संचालन पर रोक
भारतीय स्टेट बैंक में जब इस तरह के फर्जी आईडी के जरिए खाते खुलने की छानबीन किसानों ने शुरू की तो बैंक के शाखा प्रबंधक ने फर्जी खातों को ब्लाक कर दिया लेकिन तब तक चेकोें का पैसा निकल चुका था।
इन पर लगा सवालिया निशान
बाढ़ राहत की इमदाद में सेंध लगने से तहसील कर्मियों की भूमिका संदिग्ध हो गई है, जिन्होंने ऐसे लोगों को चेक दे दीं। चेक देने में लेखपाल से लेकर राजस्व निरीक्षक की भूमिका अहम रहती है।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें