तेज बुखार और जापानी इंसेफ्लाइटिस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को बेहजम ब्लाक क्षेत्र के गांव अछनिया की एक बालिका की बुखार से मौत हो गई, जिससे मरने वालों की संख्या 11 तक पहुंच गई। वहीं स्वास्थ्य विभाग के प्रयास कागजों पर ज्यादा और जमीन पर कम नजर आ रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में जानकारी के अभाव में लोगबाग अपने बच्चों का समय से इलाज नहीं करा पा रहे हैं। पीएचसी और सीएचसी पर तैनात डाक्टर बच्चों के इलाज में कोताही बरत रहे हैं, जिससे अभिभावक चाह कर भी बच्चों का उचित इलाज करा पाने से वंचित हैं। क्योंकि अछनिया की बालिका की मौत के मामले में कुछ ऐसे ही चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
ब्लाक बेहजम के गांव अछनिया निवासी इरफान की चार वर्षीय पुत्री आतिका को पांच दिन पहले बुखार आया था। परिवार वालों के मुताबिक तीन दिनों तक उसका इलाज मेडिकल स्टोर से दवा लेकर करते रहे। इन दवाओं से कुछ देर के लिए बुखार उतर जाता, उसके बाद फिर चढ़ जाता। लिहाजा मंगलवार को इरफान ने बेहजम पीएचसी में डाक्टर को दिखाकर बालिका की दवाई ली, जहां पर डाक्टर ने बीमारी के बारे में परिवार वालों को कुछ भी जानकारी नहीं दी। बल्कि कुछ लाल-पीली दवाएं देकर छुट्टी पा ली। फिर भी बालिका की सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद बुधवार को माता-पिता जिला अस्पताल पहुंचे और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ आरके वर्मा को दिखाया, जहां बालिका की गंभीर हालत होने पर तुरंत एडमिट करते हुए इमरजेंसी भेजा। इमरजेंसी में बालिका को भर्ती करने के लिए बेेड एलाटमेंट की औपचारिकताएं चल ही रहीं थी, कि तभी उसने दम तोड़ दिया। परिवार वाले बालिका का शव लेकर घर लौट गए। डॉ आरके वर्मा ने बताया कि इलाज में देरी होने के चलते बालिका को बचाया नहीं जा सका। यदि तीन-चार दिन पहले बालिका को एडमिट कराया गया होता, तो स्थिति कुछ और होती।
चिल्ड्रेन वार्ड से एक बालक रेफर
जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में सभी बेड बुखार और जेई से पीड़ित बच्चों से फुल हैं। बुुधवार को फूलबेहड़ क्षेत्र के गांव गड़रियनपुरवा निवासी शारदा प्रसाद के 12 वर्षीय पुत्र अमित को डाक्टरों ने लखनऊ रेफर कर दिया। वह कई दिनों से बुखार से पीड़ित था।
बिना डाक्टर की सलाह के इलाज से बचें
ग्रामीण इलाकों में लोग बच्चों को बुखार आने पर छोलाछाप या मेडिकल स्टोर से दवा लेकर इलाज कराते हैं, जो खतरनाक साबित हो सकता है। अछनिया निवासी इरफान की पुत्री आतिका के मामले में कुछ ऐसा ही वाकया सामने आया है, जिसमें तीन दिनों तक उसका मेडिकल स्टोर से पैरासीटामाल दवा खिलाकर इलाज किया गया। डाक्टरों की सलाह है कि बच्चों को बुखार आने पर तुरंत विशेषज्ञ डाक्टर की देखरेख में इलाज कराएं।