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Lakhimpur Kheri News: खाद भरपूर... फिर भी किसान मजबूर

Sat, 25 Jul 2026 11:01 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति बी पैक्स रुकनापुर की बंद समिति। संवाद
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लखीमपुर खीरी। जिले में खाद की कमी नहीं है, लेकिन किसान फिर भी परेशान हैं। जुलाई तक लक्ष्य से अधिक 1.23 लाख मीट्रिक टन यूरिया जिले में पहुंच चुकी है, इसके बावजूद पिछले 10 दिनों से तकनीकी खामी के चलते खाद वितरण व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट सकी है।
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23 जुलाई को लागू किए गए खाद वितरण सॉफ्टवेयर के नए 3.2.2 वर्जन से भी समस्या दूर नहीं हुई। मशीनें अपडेट हो रही हैं, लेकिन पिछला वितरण नहीं दिखने से समितियों पर खाद वितरण बाधित है। किसान घंटों लाइन में लगने के बाद भी खाली हाथ लौट रहे हैं।
जिले में 144 समितियां हैं। अधिकारियों का दावा है कि पर्याप्त खाद उपलब्ध है, लेकिन सर्वर संबंधी समस्या पूरे प्रदेश में बनी हुई है। किसानों का कहना है कि धान और गन्ने में यूरिया डालने का यह सबसे महत्वपूर्ण समय है। यदि समय पर खाद नहीं मिली तो उत्पादन प्रभावित होगा। किसानों ने मांग की है कि जब तक तकनीकी समस्या दूर नहीं होती, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था से खाद वितरण कराया जाए।
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जुलाई तक जिले को 1,18,948 एमटी यूरिया का लक्ष्य मिला था, जबकि 1,23,249 एमटी यूरिया प्राप्त हो चुकी है। इसमें 1,03,572 एमटी का वितरण हो चुका है और 19,677 एमटी स्टॉक शेष है। डीएपी का लक्ष्य 12,781 एमटी था, जबकि 13,558 एमटी प्राप्त हुई। इसमें 8,113 एमटी वितरण के बाद 5,445 एमटी उपलब्ध है।
जिले में 3.64 लाख हेक्टेयर में गन्ना, 1.04 लाख हेक्टेयर में धान और 3115 हेक्टेयर में केला की खेती है। कृषि विभाग के अनुसार, इस समय धान और गन्ने में यूरिया डालने का महत्वपूर्ण समय चल रहा है। यदि आठ से दस दिन और खाद नहीं मिली तो इन दोनों फसलों के उत्पादन पर पांच से छह प्रतिशत तक असर पड़ सकता है। हालांकि विभाग का कहना है कि बीच-बीच में किसानों को खाद मिल रही है, इसलिए फिलहाल अधिक नुकसान की आशंका नहीं है।
बिजुआ क्षेत्र की दाउदपुर, गोंधिया, बस्तौली, बिजुआ, भीरा, रमुआपुर और पड़रिया तुला समितियों में खाद उपलब्ध है, लेकिन मशीन अपडेट होने के बावजूद वितरण नहीं हो पा रहा है। वहीं भानपुर, रामनगर, मूडासवारान और कांप समितियों में खाद उपलब्ध नहीं है। इसकी जानकारी एडीओ श्यामलाल ने दी।
खमरिया बी-पैक्स समिति के सचिव अनुपम दीक्षित ने बताया कि सर्वर डाउन होने से वितरण नहीं हो सका। तिकुनिया की साधन सहकारी समिति जसनगर में दो ट्रक खाद उतरने के बाद कुछ वितरण हुआ, लेकिन बाद में सर्वर फेल होने से प्रक्रिया रोकनी पड़ी। निघासन बी-पैक्स के सचिव कौशल चतुर्वेदी ने बताया कि मशीन अपडेट होने के कारण वितरण नहीं हो सका। नौरंगाबाद साधन सहकारी समिति में शनिवार को मशीन नहीं चली। खैरीगढ़ साधन सहकारी समिति, सिंगाही में भी यही स्थिति रही। समिति सचिव रवि शुक्ला ने बताया कि मशीन अपडेट होने से वितरण नहीं हो सका। नौरंगाबाद में 27 एमटी और खैरीगढ़ में करीब 30 एमटी खाद उपलब्ध है।

11:34 बजे बंद मिली समिति
बेहजम। बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति (बी-पैक्स) रुकनापुर मूडाधामू शनिवार सुबह 11:34 बजे बंद मिली। वहां कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। किसान राजेश, मनोज और जमालुद्दीन ने बताया कि सचिव संदीप कुमार फोन नहीं उठा रहे थे। भूलनपुर के कर्मचारी रामगोपाल ने बताया कि समिति में 1000 बोरी यूरिया उपलब्ध है, लेकिन सचिव के लखीमपुर जाने के कारण वितरण नहीं हो सका। समिति सचिव प्रमोद कुमार तिवारी का फोन नहीं उठा। अछनियां समिति में 52 एमटी यूरिया उपलब्ध होने का दावा किया गया है। समिति परिसर में पेयजल की व्यवस्था भी नहीं है। संवाद

पसगवां में 400 बोरी यूरिया का वितरण
पसगवां। साधन सहकारी समिति (बी-पैक्स) पसगवां में शनिवार को 400 बोरी यूरिया का वितरण किया गया। सचिव भाई लाल ने बताया कि समिति में 1000 बोरी यूरिया उपलब्ध है। शेष वितरण सोमवार को होगा। यहां सर्वर की कोई समस्या नहीं है। वहीं भीखमपुर समिति में खाद उपलब्ध होने के बावजूद सर्वर की दिक्कत से वितरण नहीं हो सका। संवाद
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गन्ना समितियों पर 10 दिन से खाद का इंतजार
पलियाकलां। क्षेत्र की गन्ना सहकारी समितियों में पिछले 10 दिनों से खाद नहीं पहुंची है। मकनपुर, सेमरीपुरवा, भैसोरी और चंदन चौकी गन्ना समिति के सचिव ज्ञान प्रकाश तिवारी ने बताया कि दो-तीन दिन में खाद की रैक आने की उम्मीद है। बाढ़ प्रभावित समितियों बिजौरिया, खैराना, पतवारा और चौरी में फिलहाल खाद नहीं भेजी जाएगी। पलिया गन्ना सहकारी समिति के 21 खाद गोदामों में जैसे-जैसे खाद पहुंचेगी, उसका वितरण किसानों में किया जाएगा। संवाद

खाद वितरण में सर्वर की समस्या कई दिनों से है। सर्वर कभी बंद पड़ जाता है, तो कभी सही हो जाता है। इससे वितरण प्रभावित हो रहा है। सर्वर की व्यवस्था केंद्र सरकार की है। अभी किसी वैकल्पिक व्यवस्था के संबंध में दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।
-अंजनी कुमार सिंह, डीएम

आठ से 10 दिन तक खाद नहीं मिलने पर धान और गन्ने पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन जिले में बीच-बीच में खाद मिल रही है, इसलिए फिलहाल अधिक नुकसान की आशंका नहीं है।
-सूर्य प्रताप सिंह, जिला कृषि अधिकारी

नया 3.2.2 वर्जन भी पूरी तरह काम नहीं कर रहा। मशीनें अपडेट हो रही हैं, लेकिन पिछला वितरण नहीं दिख रहा। यह पूरे प्रदेश की समस्या है। शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। समाधान शासन स्तर से ही होगा।
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-प्रवीण कुमार, एआर कोऑपरेटिव

बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति बी पैक्स रुकनापुर की बंद समिति। संवाद

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